वॉशिंगटन, 12 जून (वेब वार्ता)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ संभावित ऐतिहासिक शांति समझौते को लेकर किए गए दावों को तेहरान ने सिरे से खारिज कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ किसी भी अंतिम समझौते पर अभी सहमति नहीं बनी है और राष्ट्रीय हितों से जुड़ी उसकी मूल शर्तों, जिन्हें वह अपनी “रेड लाइन्स” मानता है, पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच अंतिम समझौते की खबरें महज अटकलें हैं। उन्होंने कहा कि ईरान ने हमेशा स्पष्ट किया है कि वह अपनी बुनियादी शर्तों और राष्ट्रीय हितों से पीछे नहीं हटेगा।
अमेरिका पर रुख बदलने का आरोप
ईरान ने अमेरिका पर कूटनीतिक वार्ताओं के दौरान बार-बार अपना रुख बदलने का आरोप लगाया है। इस्माइल बघई ने कहा कि समझौते का बड़ा हिस्सा तैयार हो चुका था, लेकिन अमेरिकी पक्ष लगातार अपने पहले के रुख से पीछे हटता रहा, जिससे बातचीत की प्रक्रिया प्रभावित हुई।
उन्होंने कहा कि कतर और पाकिस्तान मध्यस्थ के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन अमेरिकी रवैये के कारण वार्ताओं को आगे बढ़ाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
ट्रंप ने किया था ऐतिहासिक समझौते का दावा
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ओवल ऑफिस से दावा किया था कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध टालने की दिशा में एक महत्वपूर्ण समाधान निकल आया है। उन्होंने कहा था कि सप्ताहांत में यूरोप में एक हस्ताक्षर समारोह आयोजित किया जा सकता है, जिसमें उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी शामिल होंगे।
ट्रंप ने यह भी दावा किया था कि संभावित समझौते के तहत ईरान कभी परमाणु हथियार विकसित नहीं कर पाएगा और होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य गतिविधियां बहाल हो जाएंगी।
होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर अमेरिका को ठहराया जिम्मेदार
ट्रंप के दावों के विपरीत इस्माइल बघई ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिकी सैन्य गतिविधियों के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य का क्षेत्र पहले की तुलना में अधिक असुरक्षित हो गया है।
उन्होंने कहा कि जब तक ईरान की बुनियादी शर्तों को स्वीकार नहीं किया जाता, तब तक किसी भी अंतिम समझौते पर मुहर लगने की संभावना नहीं है।
भारतीय नाविकों के मुद्दे पर भी अमेरिका पर आरोप
इस कूटनीतिक तनाव के बीच ईरान ने हाल में भारतीय नाविकों की मौत के मुद्दे को भी उठाया। इस्माइल बघई ने आरोप लगाया कि भारतीय वाणिज्यिक जहाजों पर हुए अमेरिकी हमले “सशस्त्र डकैती” और “राज्य प्रायोजित समुद्री डकैती” की श्रेणी में आते हैं।
उन्होंने दावा किया कि इन घटनाओं में कम से कम तीन भारतीय नागरिकों की जान गई है, जिसे उन्होंने अमेरिकी नीतियों का गंभीर उदाहरण बताया।
ईरानी प्रवक्ता ने मृत भारतीय नाविकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए भारत सरकार और भारतीय जनता के प्रति सहानुभूति प्रकट की। साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वैश्विक शांति और समुद्री सुरक्षा को प्रभावित करने वाली गतिविधियों के लिए अमेरिका को जवाबदेह ठहराया जाए।
हालांकि, इन आरोपों और दावों को लेकर दोनों देशों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मध्यस्थ देशों के प्रयासों के बीच अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत आगे किस दिशा में बढ़ती है और क्या भविष्य में किसी औपचारिक समझौते का रास्ता निकल पाता है।




