मास्को/नई दिल्ली, 21 मई (वेब वार्ता)। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक तेल बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच रूस की मुद्रा रूबल ने अप्रत्याशित मजबूती दर्ज की है। तेल निर्यात से बढ़ी आय और रूस की सख्त आर्थिक नीतियों के चलते रूबल डॉलर के मुकाबले मजबूत स्थिति में पहुंच गया है।
उपलब्ध आर्थिक आंकड़ों के अनुसार अप्रैल की शुरुआत से रूबल में उल्लेखनीय मजबूती देखी गई है और यह डॉलर के मुकाबले लगभग 72.6 के स्तर तक पहुंच गया है, जो पिछले कई महीनों का सबसे मजबूत स्तर माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति बाजार और सरकारी अनुमानों से अलग रही है, क्योंकि पहले रूबल के कमजोर होने की आशंका जताई जा रही थी।
विश्लेषकों के अनुसार पश्चिम एशिया में तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को सहारा दिया है। तेल कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा लाभ रूस जैसे बड़े ऊर्जा निर्यातक देशों को मिला है, जिससे उसकी विदेशी मुद्रा आय बढ़ी और रूबल को मजबूती मिली।
रूस पर लगाए गए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद उसकी आर्थिक नीति ने मुद्रा को सहारा दिया है। रूस ने सरकारी खर्च और मुद्रास्फीति पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए ब्याज दरों को अपेक्षाकृत ऊंचा रखा है। इससे विदेशी मुद्रा की मांग सीमित रही और घरेलू मुद्रा को समर्थन मिला।
रूस के आर्थिक नीति निर्माताओं का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में रूबल आगे भी मजबूत रह सकता है। आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहता है और तेल कीमतों में बढ़ोतरी जारी रहती है, तो रूबल को अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है।
हालांकि बाजार विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि किसी भी मुद्रा की मजबूती केवल ऊर्जा आय पर निर्भर नहीं रहती। वैश्विक राजनीति, प्रतिबंध, निवेशकों का भरोसा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की स्थिति भी भविष्य में रूबल की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
उधर वैश्विक बाजारों में बढ़ते तनाव का असर अन्य मुद्राओं पर भी देखा जा रहा है। सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में डॉलर की मांग और तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव ने कई देशों की मुद्राओं पर दबाव बढ़ाया है।




