सीहोर, 08 मई (वेब वार्ता)। सीहोर नगरपालिका में वर्षों तक सेवा देने वाले कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट अब सम्मान की जगह आर्थिक संकट का कारण बनता जा रहा है। रिटायर्ड कर्मचारियों का आरोप है कि नौकरी पूरी होने के बाद भी उन्हें ग्रेच्युटी, अवकाश नगदीकरण, बीमा राशि, जीपीएफ और समयमान वेतनमान एरियर जैसी जरूरी देय राशियां समय पर नहीं मिल रही हैं। हालात ऐसे हैं कि बुजुर्ग कर्मचारी रिटायरमेंट के बाद भी नगरपालिका कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि नगरपालिका परिषद सीहोर आर्थिक तंगी का हवाला देकर लगातार भुगतान टाल रही है। कर्मचारियों के अनुसार नौकरी के दौरान हर महीने वेतन से नियमित कटौती की जाती रही, लेकिन अब जब भुगतान की बारी आई तो उन्हें लंबे इंतजार का सामना करना पड़ रहा है। कई कर्मचारियों को एकमुश्त राशि देने के बजाय किश्तों में भुगतान किया जा रहा है, जबकि कुछ कर्मचारियों को अब तक कोई राशि नहीं मिली है। इससे कर्मचारियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
बीते अप्रैल माह में नगरपालिका परिषद सीहोर से दो कर्मचारी रिटायर हुए, जिनमें स्थायी कर्मचारी कमल परिहार और विनियमित कर्मचारी नंदकिशोर महेश्वरी शामिल हैं। दोनों कर्मचारियों को रिटायरमेंट के समय कोई बड़ी राशि नहीं मिल सकी। कमल परिहार ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष नगरपालिका की सेवा में गुजार दिए, लेकिन विदाई के समय उन्हें आर्थिक असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है।
कमल परिहार ने कहा कि यदि समय पर भुगतान मिल जाता तो वह कोई छोटा रोजगार शुरू कर सकते थे, लेकिन अब बढ़ती महंगाई के बीच परिवार का खर्च चलाना कठिन हो गया है। उन्होंने बताया कि वह पेंशन के पात्र भी नहीं हैं, ऐसे में रिटायरमेंट राशि ही उनके जीवन का एकमात्र सहारा थी। भुगतान में देरी के कारण उनका भविष्य अनिश्चितता में फंस गया है।
रिटायर्ड कर्मचारियों ने नगरपालिका कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों पर मनमानी का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि हर बार नई फाइल, नया बहाना और नई तारीख देकर उन्हें टाल दिया जाता है। कर्मचारियों के मुताबिक नौकरी के दौरान उनसे समय पर कार्य और अनुशासन की अपेक्षा की जाती थी, लेकिन अब उनके अधिकारों को लेकर प्रशासन गंभीर नहीं दिखाई दे रहा।
मामला अब जनसुनवाई तक पहुंच चुका है। रिटायर्ड कर्मचारी राजेश सूर्यवंशी ने कलेक्टर जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि अवकाश नगदीकरण, बीमा कटौती राशि और शासन द्वारा देय चतुर्थ समयमान वेतनमान एरियर का भुगतान अब तक लंबित है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार नगरपालिका कार्यालय जाने के बावजूद कोई अधिकारी उनकी समस्या का समाधान नहीं कर रहा और केवल आश्वासन देकर वापस भेज दिया जाता है।
वहीं नगरपालिका प्रशासन अपनी आर्थिक स्थिति को भुगतान में देरी का कारण बता रहा है। नगरपालिका सीएमओ सुधीर सिंह ने कहा कि नगरपालिका एक स्वायत्तशासी संस्था है और कर्मचारियों के वेतन व अन्य भुगतान टैक्स वसूली पर निर्भर करते हैं। उन्होंने बताया कि जनता द्वारा समय पर टैक्स जमा नहीं करने के कारण आर्थिक संकट की स्थिति बनी हुई है। जैसे-जैसे राशि प्राप्त होती है, उसी के अनुसार कर्मचारियों को किश्तों में भुगतान किया जा रहा है।
हालांकि रिटायर्ड कर्मचारियों का कहना है कि जीवनभर सेवा देने के बाद उन्हें इस प्रकार की परेशानियों का सामना नहीं करना चाहिए। उनका मानना है कि समय पर भुगतान नहीं मिलने से बुजुर्ग कर्मचारियों का बुढ़ापा आर्थिक असुरक्षा और मानसिक तनाव में गुजर रहा है।




