कोलकाता, राजनीतिक डेस्क | वेब वार्ता
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी के विरोध में चल रहा धरना रविवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। टीएमसी सुप्रीमो ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह चुनाव आयोग का दुरुपयोग कर वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटवा रही है।
लोकतंत्र पर हमला: ममता बनर्जी
ममता बनर्जी ने इस कार्रवाई को लोकतंत्र की नींव पर ‘सीधा हमला’ बताते हुए कहा कि देश में अभूतपूर्व तरीके से लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अपने राजनीतिक हितों के लिए संवैधानिक संस्थाओं का इस्तेमाल कर रही है।
चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल
यह बयान ऐसे समय में आया है, जब चुनाव आयोग की पूरी टीम राज्य में चुनावी तैयारियों की समीक्षा के लिए कोलकाता पहुंच रही है। टीएमसी ने आरोप लगाया है कि विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया के तहत बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।
SIR विवाद के आंकड़े
| पैरामीटर | आंकड़े |
|---|---|
| हटाए गए मतदाता | 63.66 लाख+ |
| प्रतिशत | लगभग 8.3% |
| कुल मतदाता (पहले) | 7.66 करोड़ |
| कुल मतदाता (अब) | 7.04 करोड़+ |
| अंडर रिव्यू मतदाता | 60.06 लाख+ |
संविधान बदलने का आरोप
ममता बनर्जी ने भाजपा पर आरोप लगाया कि उसका अंतिम उद्देश्य डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान को बदलना है। उन्होंने कहा कि भाजपा ‘एक राष्ट्र, एक नेता, एक पार्टी’ की विचारधारा के तहत काम कर रही है।
- भाजपा पर संस्थाओं के दुरुपयोग का आरोप
- केंद्रीय एजेंसियों और मीडिया पर भी सवाल
- बंगाल के खिलाफ साजिश का दावा
धरने का उद्देश्य
ममता बनर्जी ने कहा कि उनका धरना बंगाल के लोगों के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए है। उन्होंने इसे ‘बांग्ला-विरोधी एजेंडे’ के खिलाफ जन आंदोलन बताया और कहा कि राज्य को किसी भी तरह दबाया नहीं जा सकता।
निष्कर्ष
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक टकराव का बड़ा मुद्दा बन चुका है। आने वाले चुनावों से पहले यह मुद्दा और गर्माने की संभावना है, जिससे राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो सकती है।
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