कोलकाता, 10 मई (वेब वार्ता)। पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। दोनों दलों ने एक-दूसरे पर भड़काऊ और आपत्तिजनक बयान देने का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग से शिकायत की है।
इस विवाद के केंद्र में पानिहाटी विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार रत्ना देबनाथ और तृणमूल कांग्रेस सांसद कल्याण बनर्जी के बयान हैं। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर राजनीतिक मर्यादा और चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन करने के आरोप लगाए हैं।
तृणमूल कांग्रेस की ओर से सांसद कल्याण बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि भाजपा उम्मीदवार ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक और अभद्र भाषा का प्रयोग किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि मुख्यमंत्री के खिलाफ कथित रूप से धमकी भरे बयान दिए गए, जिससे चुनावी माहौल प्रभावित हो सकता है। टीएमसी ने चुनाव आयोग से मामले की तत्काल जांच कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
टीएमसी की शिकायत के कुछ घंटों बाद भाजपा ने भी पलटवार करते हुए चुनाव आयोग का रुख किया। भाजपा ने आरोप लगाया कि कल्याण बनर्जी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ अपमानजनक और भड़काऊ टिप्पणी की है। भाजपा नेता शिशिर बजोरिया ने शिकायत में कहा कि टीएमसी नेताओं की ओर से लगातार इस प्रकार की बयानबाजी की जा रही है, जिससे राजनीतिक माहौल विषाक्त हो रहा है।
भाजपा ने चुनाव आयोग से मांग की है कि कल्याण बनर्जी के खिलाफ आदर्श आचार संहिता के तहत कार्रवाई की जाए। साथ ही संबंधित वीडियो हटाने, भविष्य में ऐसे बयान देने से रोकने और कानूनी कार्रवाई शुरू करने की भी मांग की गई है।
पानिहाटी सीट इस बार विशेष राजनीतिक महत्व रखती है। भाजपा ने यहां उस पीड़ित डॉक्टर की मां को उम्मीदवार बनाया है, जिनका मामला पहले राज्यभर में चर्चा का विषय बना था। भाजपा इस मुद्दे को महिला सुरक्षा और न्याय से जोड़कर पेश कर रही है। दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा निजी दुख और संवेदनशील घटनाओं का राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बयानबाजी और अधिक आक्रामक हो सकती है। दोनों प्रमुख दलों के बीच बढ़ती तल्खी यह संकेत दे रही है कि आने वाले दिनों में चुनावी मुकाबला और अधिक तीखा होने वाला है।
फिलहाल चुनाव आयोग की ओर से दोनों शिकायतों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि आयोग पूरे मामले की समीक्षा कर सकता है।




