मुंबई, एंटरटेनमेंट डेस्क | वेब वार्ता
बॉलीवुड एक्ट्रेस समीरा रेड्डी ने हाल ही में अपने बचपन के संघर्षों को लेकर खुलकर बात की है। उन्होंने बताया कि बचपन में हकलाने की समस्या के कारण उन्हें अक्सर मजाक और तानों का सामना करना पड़ता था। इस वजह से उनका आत्मविश्वास प्रभावित हुआ, लेकिन कई वर्षों की थेरेपी और मेहनत के बाद उन्होंने खुद को संभाला और आज वह आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखती हैं।
बचपन में झेलना पड़ा मजाक और ताने
समीरा रेड्डी ने एक इंटरव्यू में बताया कि वह बचपन से ही हकलाती थीं, जिसके कारण स्कूल और सामाजिक माहौल में उन्हें कई बार नीचा दिखाया जाता था। इस अनुभव ने उनके आत्मविश्वास पर गहरा असर डाला।
कॉन्फिडेंस पाने के लिए ली थेरेपी
एक्ट्रेस के अनुसार, अपने आत्मविश्वास को वापस पाने के लिए उन्हें कई वर्षों तक थेरेपी लेनी पड़ी। उन्होंने कहा कि आज भी कभी-कभी वह हकलाती हैं और लोगों की प्रतिक्रिया उन्हें प्रभावित करती है।
- बचपन में हकलाने की समस्या
- लोगों द्वारा मजाक और ताने
- कई साल तक थेरेपी से सुधार
बच्चों पर लेबलिंग का असर
समीरा ने कहा कि बच्चों को बार-बार ‘कमजोर’ या ‘मंदबुद्धि’ जैसे शब्दों से पुकारना उनके आत्मविश्वास को अंदर से तोड़ देता है। इससे बच्चे खुद को कमजोर समझने लगते हैं और आगे बढ़ने से डरने लगते हैं।
| समस्या | प्रभाव |
|---|---|
| लेबलिंग (जैसे ‘कमजोर’, ‘बुद्धू’) | आत्मविश्वास में गिरावट |
| लगातार आलोचना | खुद पर संदेह |
| मजाक उड़ाना | सामाजिक दूरी और डर |
बच्चों को दिया खास संदेश
समीरा रेड्डी ने बताया कि वह अपने बच्चों को हमेशा खुलकर बात करने की सलाह देती हैं। उन्होंने कहा कि किसी एक कमजोरी से किसी व्यक्ति की पहचान तय नहीं होती। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि किसी को नीचा दिखाना गलत है और बच्चों को संवेदनशील और सहानुभूतिपूर्ण बनाना जरूरी है।
निष्कर्ष
समीरा रेड्डी की यह कहानी बताती है कि कठिनाइयों के बावजूद आत्मविश्वास वापस पाया जा सकता है। उनका अनुभव समाज के लिए एक संदेश है कि बच्चों को सकारात्मक माहौल देना और उन्हें प्रोत्साहित करना कितना जरूरी है।
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