ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस में इस्राइल की एंट्री, नेतन्याहू के फैसले से बढ़ी हलचल

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वॉशिंगटन/तेल अवीव, अंतरराष्ट्रीय डेस्क | वेब वार्ता

गाजा संकट को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रस्तावित शांति योजना के तहत गठित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में अब इस्राइल भी शामिल होगा। इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बोर्ड में शामिल होने पर सहमति जता दी है। यह फैसला इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि पहले इस्राइल सरकार ने इस बोर्ड के गठन और इसके सदस्यों को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया था।

पहले विरोध, अब सहमति: बदला इस्राइल का रुख

बोर्ड ऑफ पीस के गठन की घोषणा के बाद इस्राइल सरकार ने नाराजगी जताई थी। इस्राइल का कहना था कि इस बोर्ड के गठन से पहले उससे कोई परामर्श नहीं किया गया और यह उसकी सुरक्षा व गाजा नीति से मेल नहीं खाता। सत्तारूढ़ दल के साथ-साथ विपक्ष ने भी इस पहल की आलोचना की थी। इसके बावजूद अब प्रधानमंत्री नेतन्याहू द्वारा इसमें शामिल होने की सहमति देना एक बड़ा कूटनीतिक बदलाव माना जा रहा है।

सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ने की थी आलोचना

इस्राइल के सुरक्षा मंत्री ने बोर्ड ऑफ पीस को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि गाजा को किसी प्रशासनिक समिति की नहीं, बल्कि हमास के आतंकियों से मुक्ति की जरूरत है। वहीं विपक्ष के नेता येर लापिड ने बोर्ड के एलान को इस्राइल के लिए कूटनीतिक विफलता करार दिया था। ऐसे में नेतन्याहू का यह यू-टर्न कई सवाल खड़े कर रहा है।

बोर्ड ऑफ पीस में कौन-कौन शामिल

अमेरिका ने शनिवार को बोर्ड ऑफ पीस के सदस्यों के नामों की घोषणा की थी। इसमें तुर्किये के विदेश मंत्री, कतर सरकार के प्रतिनिधि, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर जैसे नाम शामिल हैं। इन नामों को लेकर ही इस्राइल ने पहले आपत्ति जताई थी।

क्या है गाजा का ‘बोर्ड ऑफ पीस’

बोर्ड ऑफ पीस को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से गाजा में शांति स्थापित करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में पेश किया गया है। व्हाइट हाउस का दावा है कि इसका मुख्य उद्देश्य इस्राइल और फलस्तीन के बीच संघर्ष को समाप्त कर क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करना है।

यह बोर्ड ट्रंप की 20-सूत्रीय गाजा शांति योजना को लागू करने के लिए गठित किया गया है। इस योजना के तहत संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में स्थिरता बढ़ाने, कानूनी शासन बहाल करने और दीर्घकालिक शांति सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।

कैसा होगा बोर्ड ऑफ पीस का ढांचा

1. संस्थापक कार्यकारी परिषद

यह बोर्ड का सबसे शीर्ष निकाय होगा, जिसकी अध्यक्षता स्वयं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप करेंगे। इस परिषद के पास सभी निर्णयों पर वीटो का अधिकार होगा। इसमें अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो, पश्चिम एशिया में ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, जेरेड कुशनर, टोनी ब्लेयर और विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।

2. गाजा कार्यकारी बोर्ड

यह निकाय क्षेत्रीय समन्वय और गाजा में शासन से जुड़े जमीनी कार्यों की देखरेख करेगा। इसमें तुर्किये, कतर, मिस्र और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के प्रतिनिधि शामिल किए गए हैं।

3. गाजा प्रशासन के लिए राष्ट्रीय समिति (एनसीएजी)

यह सबसे निचला स्तर होगा, जिसमें फलस्तीनी तकनीकी विशेषज्ञ शामिल होंगे। ये विशेषज्ञ गाजा में स्वास्थ्य, शिक्षा, वित्त और अन्य बुनियादी सेवाओं के प्रशासन का कार्य संभालेंगे।

  • बोर्ड ऑफ पीस ट्रंप की 20-सूत्रीय गाजा योजना को लागू करेगा
  • शीर्ष परिषद की अध्यक्षता अमेरिकी राष्ट्रपति करेंगे
  • क्षेत्रीय देशों को गाजा प्रशासन में अहम भूमिका
  • फलस्तीनी विशेषज्ञों को स्थानीय शासन की जिम्मेदारी

क्या बदलेंगे पश्चिम एशिया के समीकरण?

इस्राइल की बोर्ड ऑफ पीस में एंट्री को पश्चिम एशिया की राजनीति में संभावित बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस्राइल सक्रिय भूमिका निभाता है, तो गाजा में संघर्ष के समाधान की दिशा में नई पहल हो सकती है। हालांकि आलोचकों का कहना है कि बिना जमीनी सहमति और सुरक्षा गारंटी के यह योजना व्यावहारिक साबित होगी या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

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