वॉशिंगटन/नई दिल्ली, अंतरराष्ट्रीय डेस्क | वेब वार्ता
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया है कि मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित युद्ध को उन्होंने रोकने में अहम भूमिका निभाई थी। व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि दोनों देश गंभीर सैन्य टकराव की स्थिति में थे और हालात परमाणु युद्ध तक पहुंच सकते थे। यह बयान उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल की पहली वर्षगांठ पर दिया, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है।
“आठ विमान गिराए गए, हालात थे भयावह” — ट्रंप
#WATCH | US President Donald Trump says, “…I ended eight unendable wars in 10 months…Pakistan and India. They were really going at it. Eight planes were shot down. They were going to go nuclear, in my opinion. The Prime Minister of Pakistan was here and he said, President… pic.twitter.com/kTDa912iLQ
— ANI (@ANI) January 20, 2026
ट्रंप ने कहा, “पिछले दस महीनों में मैंने आठ ऐसे युद्ध खत्म कराए, जो रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। भारत और पाकिस्तान उस समय सचमुच युद्ध की कगार पर थे। आठ विमान गिराए गए थे और मेरे आकलन में दोनों देश परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के करीब पहुंच चुके थे।”
उन्होंने आगे कहा, “पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने मुझसे निजी तौर पर कहा कि मेरी पहल से लाखों लोगों की जान बची। मैंने मध्यस्थता नहीं की, लेकिन मैंने युद्ध होने से रोका।”
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत-पाकिस्तान सीमा पर शांति बनाए रखने के प्रयासों को लेकर कई तरह की अंतरराष्ट्रीय चर्चाएँ हो रही हैं।
नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर ट्रंप का दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस दौरान नोबेल शांति पुरस्कार पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि उन्हें “हर युद्ध खत्म करने के लिए” यह सम्मान मिलना चाहिए। ट्रंप पहले भी कई बार सार्वजनिक मंचों से खुद को नोबेल पुरस्कार का “हकदार” बता चुके हैं, हालांकि अब तक उन्हें यह पुरस्कार नहीं मिला है।
भारत का जवाब — “किसी तीसरे देश की भूमिका नहीं”
भारत सरकार ने ट्रंप के इन बयानों को पहले की तरह एक बार फिर सिरे से खारिज किया है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम किसी बाहरी हस्तक्षेप का नतीजा नहीं था। यह निर्णय दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच आपसी बातचीत से हुआ था।
सरकार ने स्पष्ट किया कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की थी। इसके बाद 10 मई 2025 को पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारतीय डीजीएमओ से संपर्क कर संघर्ष विराम का प्रस्ताव रखा, जिसे आपसी सहमति से लागू किया गया।
भारत का सख्त रुख — आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप अस्वीकार्य
विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत-पाकिस्तान के बीच सभी बातचीत द्विपक्षीय ढांचे के तहत होती हैं। किसी तीसरे देश की मध्यस्थता की कोई भूमिका नहीं है और न होगी। भारत ने हमेशा कहा है कि उसके आंतरिक या पड़ोसी संबंधों से जुड़े मामलों में बाहरी हस्तक्षेप अस्वीकार्य है।
- ट्रंप ने कहा — भारत-पाकिस्तान “परमाणु टकराव के करीब” थे।
- भारत ने बयान को खारिज करते हुए कहा — संघर्षविराम आपसी सहमति से हुआ।
- ट्रंप ने खुद को नोबेल शांति पुरस्कार का “हकदार” बताया।
ट्रंप के इस बयान के बाद एक बार फिर दक्षिण एशिया में शांति प्रक्रिया को लेकर अंतरराष्ट्रीय हलकों में बहस शुरू हो गई है। हालांकि, भारत का रुख स्पष्ट है — “शांति और सुरक्षा हमारी शर्तों पर, किसी की मध्यस्थता पर नहीं।”
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