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यूपी में कक्षा 6 से 12 तक छात्राओं को मुफ्त सैनिटरी नैपकिन, स्कूल से बाहर किशोरियों को भी लाभ

लखनऊ, 19 सितंबर (वेब वार्ता)। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने किशोरियों के माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता को लेकर महत्वपूर्ण पहल की दिशा में कदम बढ़ाया है। प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में कक्षा छह से 12 तक पढ़ने वाली सभी छात्राओं को निःशुल्क सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराने की व्यवस्था तैयार की जा रही है। इस सुविधा का विस्तार सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों की छात्राओं के साथ-साथ पढ़ाई बीच में छोड़ चुकी और स्कूल नहीं जाने वाली किशोरियों तक भी किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य माहवारी स्वच्छता से जुड़ी आवश्यक सुविधाओं को अधिक से अधिक किशोरियों तक पहुंचाना है।

राज्य स्तरीय नीति बनाने की तैयारी

किशोरियों के माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से संबंधित विभिन्न योजनाओं और सुविधाओं को एकीकृत करने के लिए प्रदेश में राज्य स्तरीय नीति विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। इस नीति के माध्यम से माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता सेवाओं को समग्र और संस्थागत स्वरूप देने तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।

यह निर्णय राज्य स्तरीय माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समिति की एनेक्सी भवन में आयोजित बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अमित कुमार घोष ने की। बैठक में किशोरियों तक स्वास्थ्य और स्वच्छता संबंधी सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय मजबूत करने को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों की छात्राओं को लाभ

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत सरकारी विद्यालयों में कक्षा छह से 12 तक अध्ययनरत सभी छात्राओं को निःशुल्क सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अतिरिक्त सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों की छात्राओं को भी इस सुविधा के दायरे में लाने की तैयारी है।

सरकार की योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू उन किशोरियों तक भी स्वच्छता संबंधी सुविधाएं पहुंचाना है, जो किसी कारणवश विद्यालय नहीं जा रही हैं अथवा पढ़ाई बीच में छोड़ चुकी हैं। इसके लिए ऐसी किशोरियों की पहचान कर उन्हें आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित की जाएगी।

अधिकारियों के अनुसार, माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता सेवाओं का लाभ समाज के वंचित समूहों तथा विद्यालय से बाहर रह रही किशोरियों तक पहुंचाना इस पहल की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।

नियमित जागरूकता सत्रों पर जोर

विद्यालयों में माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता प्रबंधन से संबंधित जागरूकता कार्यक्रमों को नियमित शैक्षिक गतिविधियों का हिस्सा बनाने की योजना है। किशोरियों को माहवारी शुरू होने से पहले ही इसके संबंध में आवश्यक जानकारी देने तथा उन्हें मानसिक रूप से तैयार करने के लिए विशेष जागरूकता सत्र आयोजित किए जाएंगे।

इन कार्यक्रमों के माध्यम से किशोरियों को स्वच्छ एवं सुरक्षित माहवारी व्यवहार, व्यक्तिगत स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों के बारे में जानकारी दी जाएगी। साथ ही माहवारी से जुड़े सामाजिक मिथकों, भ्रांतियों और झिझक को दूर करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

जागरूकता अभियान को प्रभावी बनाने के लिए डिजिटल माध्यमों, सामाजिक माध्यमों तथा संचार के अन्य साधनों का उपयोग किए जाने की योजना है।

स्वच्छ विद्यालयी वातावरण उपलब्ध कराने के निर्देश

बैठक में अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ अपनी जिम्मेदारियों का समयबद्ध और प्रभावी ढंग से निर्वहन करने के निर्देश दिए। उन्होंने विद्यालयों में स्वच्छता व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि किशोरियों के लिए ऐसा सुरक्षित और सहज वातावरण तैयार किया जाए, जहां उन्हें स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से जुड़ी आवश्यक सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हो सकें। उन्होंने माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता संबंधी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी संबंधित विभागों को मिलकर कार्य करने के निर्देश दिए, ताकि जरूरतमंद किशोरियों तक सुविधाएं समय पर पहुंचाई जा सकें।

किशोरियों के स्वास्थ्य और शिक्षा को मिलेगा प्रोत्साहन

माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार किशोरियों के स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और विद्यालयी सहभागिता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। निःशुल्क सैनिटरी नैपकिन की उपलब्धता तथा जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से किशोरियों को माहवारी से संबंधित आवश्यक जानकारी और संसाधन उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

राज्य स्तरीय नीति के माध्यम से विभिन्न विभागों की योजनाओं को एकीकृत करने की पहल से इन सेवाओं की पहुंच और क्रियान्वयन को व्यवस्थित बनाने की उम्मीद है। हालांकि, इस व्यवस्था के पूर्ण क्रियान्वयन की समयसीमा और वितरण संबंधी विस्तृत दिशा-निर्देश अभी सामने आना बाकी हैं।

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