राज्यउत्तर प्रदेशतर्कसंगत एंटीबायोटिक जागरूकता दिवस का हुआ आयोजन

तर्कसंगत एंटीबायोटिक जागरूकता दिवस का हुआ आयोजन

– बिना डॉक्टरी सलाह के एंटीबायोटिक का सेवन गंभीर खतरा
कानपुर। गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल (जीएसवीएम) मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में ”तर्कसंगत एंटीबायोटिक जागरूकता दिवस“ का आयोजन किया गया। इस दौरान विशेषज्ञों ने सचेत किया कि बिना डॉक्टरी परामर्श के एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन स्वास्थ्य के लिए अत्यंत घातक साबित हो सकता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. शैलेंद्र गौतम ने कहा कि एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) एक गंभीर चुनौती बना रहा है। एंटीबायोटिक दवाओं के अत्यधिक और अनुचित उपयोग के कारण बैक्टीरिया इन दवाओं के प्रति प्रतिरोधी होते जा रहे हैं। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद र्(आअसीएमआर) के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि भारत में एएमएआर एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है। इसके चलते अब निमोनिया, सेप्सिस और यूटीआई (मूत्र मार्ग संक्रमण) जैसे गंभीर संक्रमणों के इलाज में भी प्रभावी दवाओं का चयन बेहद कठिन हो गया है।
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. यशवंत के. राव ने अभिभावकों से विशेष अपील करते हुए कहा कि बच्चों में सर्दी-खांसी और सामान्य वायरल बुखार में एंटीबायोटिक दवाओं की बिल्कुल आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि ये दवाएं वायरस पर असर नहीं करती हैं। बिना परामर्श के दवा देने से बच्चों की आंतों में मौजूद लाभदायक बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ जाता है और भविष्य के लिए दवा प्रतिरोधक क्षमता उत्पन्न होने का जोखिम बढ़ जाता है। इसी क्रम में डॉ. अमितेश यादव ने बताया कि जब संक्रमण प्रतिरोधी हो जाता है, तो मरीज को लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ता है। इससे इलाज की अवधि, जटिलताएं और आर्थिक बोझ दोनों बढ़ जाते हैं। उन्होंने सख्त सलाह दी कि पुरानी बची हुई दवा का खुद से दोबारा इस्तेमाल करना या किसी अन्य व्यक्ति को देना बेहद खतरनाक है। इस दौरान कार्यक्रम में डॉ. नेहा अग्रवाल, डॉ. राहुल, डॉ. रश्मि सहित लगभग 35 वरिष्ठ चिकित्सकों एवं रेजिडेंट्स ने भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित डॉक्टरों ने एंटीबायोटिक के विवेकपूर्ण उपयोग और समाज में इसके प्रति जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।

विशेषज्ञों ने की आम जनमानस से अपील
चिकित्सका विशेषज्ञो ने अपील करते हुए कहा है कि केवल उचित चिकित्सकीय संकेत, मरीज की स्थिति और जांच रिपोर्ट के आधार पर ही एंटीबायोटिक लिखें।
आमजन बिना डॉक्टर के पर्चे के एंटीबायोटिक न खरीदें और न ही मनमाने ढंग से इनका सेवन करें। डॉक्टर द्वारा निर्धारित खुराक (डोज) और समयावधि का पूरा पालन करें, बीच में दवा बंद न करें।

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