यौमे आशूरा पर तिलकहना में अकीदत के साथ खिचड़ा नजर-नियाज़, अमन और भाईचारे का दिया संदेश

पचपेड़वा (बलरामपुर) | कमर खान | वेब वार्ता

Muharram Pachpedwa Balrampur के तहत बलरामपुर जनपद के पचपेड़वा क्षेत्र स्थित तिलकहना गांव में मुहर्रम कमेटी द्वारा यौमे आशूरा के अवसर पर श्रद्धा एवं अकीदत के साथ धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की याद में खिचड़ा तैयार कर नजर-नियाज़ पेश की गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने सहभागिता कर अमन, भाईचारे और इंसानियत का संदेश दिया।

⚡ Quick Info

  • तिलकहना गांव में यौमे आशूरा पर धार्मिक आयोजन।
  • हजरत इमाम हुसैन की याद में खिचड़ा नजर-नियाज़ पेश।
  • बड़ी संख्या में लोगों ने कार्यक्रम में की सहभागिता।
  • अमन, भाईचारे और एकता का दिया संदेश।
  • मुहर्रम कमेटी ने हर वर्ष आयोजन जारी रखने का संकल्प दोहराया।

श्रद्धा और अकीदत के साथ हुआ आयोजन

मुहर्रम कमेटी तिलकहना द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कर्बला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कमेटी के सदस्यों ने पारंपरिक तरीके से खिचड़ा तैयार कर हजरत इमाम हुसैन की याद में नजर-नियाज़ पेश की। आयोजन के दौरान लोगों ने कर्बला की महान कुर्बानी को याद करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।

यौमे आशूरा का संदेशकार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने हजरत इमाम हुसैन की कुर्बानी को इंसानियत, सत्य, न्याय, धैर्य और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक बताते हुए समाज में शांति और भाईचारे को मजबूत बनाने का संदेश दिया।

अमन और भाईचारे पर दिया गया जोर

मुहर्रम कमेटी के अध्यक्ष मो. कासिम आज़ाद ने बताया कि प्रत्येक वर्ष की तरह इस बार भी यौमे आशूरा पर यह आयोजन पूरी श्रद्धा के साथ किया गया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य केवल धार्मिक परंपरा का निर्वहन करना ही नहीं, बल्कि समाज में आपसी सौहार्द, भाईचारे और शांति का संदेश फैलाना भी है।

उन्होंने कहा कि कर्बला की घटना हमें सत्य, न्याय और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। इसलिए समाज के सभी वर्गों को प्रेम और सद्भाव के साथ मिलकर रहना चाहिए।

विवरणजानकारी
आयोजनयौमे आशूरा कार्यक्रम
स्थानतिलकहना, पचपेड़वा (बलरामपुर)
आयोजकमुहर्रम कमेटी तिलकहना
विशेष आयोजनखिचड़ा नजर-नियाज़

कर्बला के शहीदों को किया याद

कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने कर्बला के शहीदों को श्रद्धापूर्वक याद किया और उनकी कुर्बानी से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। वक्ताओं ने कहा कि यौमे आशूरा केवल धार्मिक आस्था का अवसर नहीं बल्कि सत्य, इंसाफ और मानवता के मूल्यों को आत्मसात करने का भी संदेश देता है।

सामाजिक सद्भाव का प्रतीक बना आयोजनकार्यक्रम में क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों, युवाओं और स्थानीय लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। सभी ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग करते हुए समाज में शांति, सद्भाव और आपसी भाईचारे को मजबूत करने का संकल्प दोहराया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img
- Advertisement -spot_img

Latest

- Advertisement -spot_img
- Advertisement -

More articles

- Advertisement -
- Advertisement -