ग्वालियर | मुकेश शर्मा | वेब वार्ता
Dr Akshay Nigam Investigation को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय (G.R. Medical College) के पूर्व अधिष्ठाता एवं वर्तमान रेडियोथैरेपी विभागाध्यक्ष डॉ. अक्षय कुमार निगम पर वित्तीय अनियमितताओं, खरीद प्रक्रिया, आउटसोर्स भर्ती और प्रशासनिक निर्णयों से जुड़े कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उपलब्ध शिकायतों के अनुसार इन मामलों की जांच लोकायुक्त, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) और सीबीआई सहित विभिन्न एजेंसियों में लंबित बताई जा रही है। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच एजेंसियों एवं न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
- पूर्व अधिष्ठाता डॉ. अक्षय निगम पर कई वित्तीय अनियमितताओं के आरोप।
- लोकायुक्त, EOW और CBI में जांच लंबित होने का दावा।
- लगभग ₹9.5 करोड़ अग्रिम भुगतान पर सवाल।
- GeM खरीद, स्किल लैब और आउटसोर्स भर्ती पर भी आरोप।
- संबंधित मामलों की जांच जारी, अंतिम निर्णय आना शेष।
करोड़ों रुपये के अग्रिम भुगतान और खरीद प्रक्रिया पर सवाल
शिकायतों और उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, डॉ. अक्षय निगम पर अधिष्ठाता रहते हुए विभिन्न निजी फर्मों को लगभग 9.5 करोड़ रुपये का अग्रिम भुगतान करने का आरोप लगाया गया है। इसके अलावा GeM पोर्टल के माध्यम से की गई कुछ खरीद में बाजार मूल्य की तुलना में कथित रूप से अधिक दरों पर सामग्री खरीदने का भी आरोप है।
इसी क्रम में शासन की स्वीकृति के बिना लगभग 3 करोड़ रुपये के रिनोवेशन कार्य कराए जाने का भी आरोप शिकायतों में शामिल है। इन आरोपों की पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों द्वारा की जानी शेष है।
स्किल लैब और आउटसोर्स भर्ती भी जांच के दायरे में
शिकायतों के अनुसार, केंद्र सरकार की लगभग 1.40 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित स्किल लैब में स्वीकृत उपकरणों की उपलब्धता को लेकर प्रश्न उठाए गए हैं। साथ ही लगभग 7 लाख रुपये की ब्याज राशि के उपयोग पर भी आपत्ति दर्ज कराई गई है।
इसके अतिरिक्त 1000 बिस्तरों वाले अस्पताल के लिए स्वीकृत 484 आउटसोर्स पदों पर सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना भर्ती किए जाने का आरोप भी लगाया गया है, जिससे शासन को आर्थिक क्षति होने का दावा किया गया है।
| आरोप | विवरण |
|---|---|
| अग्रिम भुगतान | लगभग ₹9.5 करोड़ |
| खरीद प्रक्रिया | GeM पर कथित अधिक दरों पर खरीद |
| रिनोवेशन | लगभग ₹3 करोड़, स्वीकृति संबंधी प्रश्न |
| स्किल लैब | ₹1.40 करोड़ परियोजना पर आरोप |
| ब्याज राशि | लगभग ₹7 लाख के उपयोग पर सवाल |
| आउटसोर्स भर्ती | 484 पदों पर कथित अनियमित नियुक्तियां |
पूर्व कार्रवाई और लंबित जांच का उल्लेख
उपलब्ध जानकारी के अनुसार वर्ष 2017 में आयुष्मान योजना से जुड़े एक मामले में लोकायुक्त जांच के बाद डॉ. निगम के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई करते हुए उनकी वेतनवृद्धि रोके जाने का उल्लेख मिलता है। वहीं एक अन्य प्रकरण में न्यायालय द्वारा जुर्माना लगाए जाने का भी दावा किया गया है।
बताया जाता है कि मार्च 2024 में तत्कालीन संभागायुक्त ने भी शासन को पत्र लिखकर कुछ वित्तीय एवं प्रशासनिक मामलों पर आपत्ति दर्ज कराई थी। वर्तमान में विभिन्न एजेंसियों में जांच लंबित होने के बावजूद डॉ. निगम के विभागाध्यक्ष पद पर बने रहने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।




