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हरदोई में विकास के दावों की खुली पोल: तिरपाल के नीचे घुटती बुजुर्ग विधवा की चीख, सपा नेता ने दिया मदद का भरोसा

लक्ष्मीकान्त पाठक

हरदोई 20 सितम्बर (वेबवार्ता)‘सबका साथ, सबका विकास’ और ‘डिजिटल इंडिया’ जैसे बड़े-बड़े दावों की जमीनी हकीकत देखनी हो, तो हरदोई जिले के अहिरोरी ब्लॉक स्थित ग्राम बम्हनिया गोंडाधार चले आइए। यहाँ विकास के दावों की सरेआम पोल खुल रही है। भीषण गर्मी, हाड़ कंपाने वाली ठंड और मूसलाधार बारिश के बीच एक बुजुर्ग और बेसहारा महिला, कृष्णा देवी, फटी हुई पन्नी और तिरपाल के नीचे कीचड़ व बदहाली में दिन काटने को मजबूर हैं। लाखों की लग्जरी गाड़ियों में घूमने वाले प्रशासनिक अफसरों और सत्ताधीशों को इस लाचार मां की सिसकियाँ तक दिखाई नहीं दे रही हैं।

दफ़्तरों के चक्कर काट-काटकर थकी गरीब विधवा, नहीं पसीजा संवेदनहीन सिस्टम

पति के देहांत के बाद कृष्णा देवी का परिवार पूरी तरह टूट चुका है। बेटा कर्मकांड करके जैसे-तैसे दो वक्त की सूखी रोटी का इंतजाम करता है। एक अदद सरकारी आवास (पक्के मकान) के लिए इस बूढ़ी मां ने प्रशासनिक दफ़्तरों की न जाने कितनी चौखटें घिसीं, लेकिन संवेदनहीन व्यवस्था की फाइलों में दबकर इस गरीब का हक गुम हो गया। अंततः थक-हारकर कृष्णा देवी इस निकम्मे और बहरे सिस्टम को कोसते हुए अपनी किस्मत के भरोसे जीने को मजबूर हो गईं। जब सरकारी तंत्र मौन रहा, तब ढांढस बंधाने पहुँचे सपा नेता जब गरीबों का हक मारने वाला सरकारी महकमा मूकदर्शक बना रहा, तब समाजवादी पार्टी के जुझारू नेता रामज्ञान गुप्ता इस बेसहारा मां का दर्द बांटने आगे आए। गाँव पहुँचकर झोपड़ी के बदतर हालात और कृष्णा देवी की दुर्दशा देख उनका दिल पसीज गया। उन्होंने गूंगे-बहरे प्रशासन की कार्यशैली की कड़े शब्दों में निंदा की।

‘प्रशासन ने नहीं दिया, तो निजी खर्चे से दिलाऊंगा आशियाना’

रामज्ञान गुप्ता ने ग्रामीणों के सामने ऐलान किया कि वे इस अंधी सरकार और संवेदनहीन प्रशासन की भीख का इंतजार नहीं करेंगे। यदि प्रशासन जल्द आवास उपलब्ध नहीं कराता है, तो वे अपने निजी खर्चे से जो भी संभव होगा तत्काल मदद करके इस बेसहारा माँ को सुरक्षित आशियाना प्रदान करेंगे। साथ ही उन्होंने वादा किया कि वर्ष 2027 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनते ही 6 महीने के भीतर कृष्णा देवी को पक्का मकान बनवाकर दिया जाएगा। “विकास केवल चमचमाती सड़कों और ऊंची इमारतों का नाम नहीं है; असली विकास तो समाज की आखिरी पंक्ति में खड़े आखिरी व्यक्ति तक पहुँचने का नाम है।” इस दौरान ग्रामीणों ने भी शासन-प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश जताया। मौके पर सच्चिदानंद त्रिपाठी, धर्मेंद्र यादव ‘दीपू’, कपिल यादव, शुभम गुप्ता, असलम गाजी, अंकित सिंह परौची, श्याम गुप्ता और सोनू गुप्ता सहित अनेक लोग मौजूद रहे।

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