हरदोई वेबवार्ता) लगातार हुई बारिश ने कछौना क्षेत्र की बदहाल जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी है। वर्षों से सफाई के अभाव, जलकुंभी और घास से पट चुकी ड्रेनें तथा जगह-जगह हुए अतिक्रमण के कारण कस्बे से लेकर गांवों तक जलभराव ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया। खेतों में पानी भरने से किसानों की सैकड़ों बीघा फसल बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गई है, जबकि कई स्थानों पर आवागमन तक बाधित हो गया।
कस्बा और ग्रामीण क्षेत्रों की जल निकासी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली ये ड्रेनें सिंचाई विभाग के अधीन हैं। क्षेत्र में बघौली, समसपुर, बालामऊ, ककरहिया, महरी, कछौना, कटियामऊ, गढ़ी कमालपुर, अलावलपुर, सैदूपुर, रैसों और सेमरी सहित कई ड्रेनें हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से इनकी समुचित सफाई न होने के कारण पानी का प्राकृतिक बहाव बाधित है। परिणामस्वरूप बारिश का पानी खेतों और आबादी में फैल रहा है।
रैसों ड्रेन सबसे बड़ी मुसीबत
क्षेत्र में रैसों ड्रेन की स्थिति सबसे गंभीर बताई जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि औद्योगिक क्षेत्र में स्थित पेप्सी प्लांट के पास ड्रेन के बहाव में कथित रूप से अवरोध पैदा होने के कारण पानी की निकासी के लिए अपेक्षाकृत संकरी नाली रह गई है। इससे पानी का प्रवाह प्रभावित होने का दावा किया जा रहा है।
इसके चलते गौहानी, गढ़ी कमालपुर, शमशेर नगर, बराही, ककरहिया, गढ़ी, सुजानपुर, पूरा, मल्हपुर, नैरा, धौतेरा, कुडरी, कटियामऊ, समधा, खेरवा, रैसों, बघुआमऊ, अलावलपुर और फार्मखेड़ा समेत कई गांव प्रभावित हुए हैं। जलभराव के कारण किसानों की फसलें पानी में डूबी हैं और उनकी सालभर की मेहनत पर संकट खड़ा हो गया है।
कछौना ड्रेन ने कस्बे की बढ़ाई परेशानी
कस्बे से होकर गुजरने वाली कछौना ड्रेन भी अतिक्रमण और सफाई के अभाव में परेशानी का सबब बनी हुई है। बारिश के बाद मुख्य मार्ग और मोहल्लों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक पानी पहुंचने से स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हुईं।
समसपुर ड्रेन की लंबे समय से सफाई न होने का असर मतुआ से पुरवा संपर्क मार्ग पर भी पड़ा। मार्ग पर पानी भर जाने से दर्जनों गांवों का आवागमन प्रभावित हुआ। मतुआ गांव में कच्चे मकानों के गिरने का खतरा भी पैदा हो गया। ग्रामीणों ने ड्रेन की सफाई न होने और तालाब संचालक द्वारा ड्रेन में लोहे का जाल लगाए जाने का आरोप लगाते हुए कोतवाली कछौना में विरोध जताया था।
पुलिया बंद होने से कई गांवों की फसलें जलमग्न
मोहाई, देवनपुर, त्यौरी और तकिया गांवों के पानी की निकासी गौड़ेला तालाब से पवना तालाब होते हुए समसपुर ड्रेन के रास्ते सई नदी तक होने की व्यवस्था बताई जाती है। ग्रामीणों का आरोप है कि हाईवे निर्माण के दौरान पीएमसी कंपनी द्वारा बीएसएनएल टावर के पास जल निकासी के लिए बनी पुलिया बंद कर दिए जाने से पानी की निकासी प्रभावित हुई। इसका खामियाजा इन गांवों के किसानों को भुगतना पड़ रहा है और सैकड़ों बीघा फसल जलभराव की चपेट में आ गई है।
तेरवा साइफन पर भी ग्रामीणों द्वारा पानी के बहाव का रास्ता अवरुद्ध किए जाने की बात सामने आई है। वहीं एनएच-731 के किनारे भी कई स्थानों पर भवन स्वामियों द्वारा अपने प्रतिष्ठानों और मकानों के सामने नालों अथवा ड्रेन के रास्ते में निर्माण किए जाने के आरोप हैं। इन सभी अवरोधों ने क्षेत्र की जल निकासी व्यवस्था को और जटिल बना दिया है।
समाधान के लिए आंदोलन की चेतावनी
लगातार जलभराव से किसानों और ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ रहा है। क्षेत्रीय विकास जन आंदोलन के संयोजक रामखेलावन कनौजिया ने कहा कि जल निकासी की समस्या को लेकर शीघ्र ही शासन-प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर स्थिति से अवगत कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो न्यायालय की शरण लेकर जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए संघर्ष किया जाएगा।
ग्रामीणों की मांग है कि सभी प्रमुख ड्रेनों की तत्काल सफाई कराई जाए, अतिक्रमण हटाया जाए और बंद अथवा बाधित जल निकासी मार्गों को खोला जाए, ताकि अगली बारिश में कछौना को फिर जलभराव की त्रासदी न झेलनी पड़े।
कछौना में जल निकासी व्यवस्था ध्वस्त, ड्रेनों पर अतिक्रमण और सफाई के अभाव में डूबी सैकड़ों बीघा फसल

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