लक्ष्मीकान्त पाठक
हरदोई (वेबवार्ता) गर्भावस्था के दौरान गंभीर एनीमिया मां और गर्भस्थ शिशु, दोनों के लिए जोखिम बढ़ा सकता है, लेकिन समय पर पहचान और उचित उपचार से इस खतरे को काफी हद तक टाला जा सकता है। हरदोई में फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज (एफसीएम) इसी दिशा में उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आया है। मई से अगस्त 2026 के बीच जिले के चार ब्लॉकों में 747 गर्भवती महिलाओं को एफसीएम दिया गया।
पिहानी ब्लॉक के पंडरवा गांव की सुमन (बदला हुआ नाम) इसका उदाहरण हैं। गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में उनका हीमोग्लोबिन करीब 10 ग्राम प्रति डेसीलीटर था, जो सातवें माह तक घटकर सात ग्राम रह गया। आयरन-फॉलिक एसिड (आईएफए) की गोलियां लेने में परेशानी के कारण वह नियमित सेवन नहीं कर पा रही थीं और कमजोरी भी महसूस होती थी।
आठवें माह में दोबारा जांच के दौरान हीमोग्लोबिन कम मिलने पर चिकित्सकीय सलाह और परिवार की सहमति से उन्हें एफसीएम दिया गया। करीब एक माह बाद जांच में हीमोग्लोबिन बढ़कर 10 ग्राम प्रति डेसीलीटर हो गया। उपचार के बाद उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई और बाद में उनका सामान्य प्रसव हुआ। उन्होंने 2.7 किलोग्राम वजन के स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया।
पिहानी की ही सविता का हीमोग्लोबिन सात ग्राम प्रति डेसीलीटर था। चिकित्सकीय सलाह के बाद उन्हें एफसीएम दिया गया। करीब एक माह बाद जांच में हीमोग्लोबिन बढ़कर 11 ग्राम प्रति डेसीलीटर हो गया। लाभार्थियों के अनुसार, एफसीएम के बाद उन्हें किसी तरह की परेशानी महसूस नहीं हुई और आयरन की गोलियां लेने में होने वाली दिक्कत से भी राहत मिली।
चार महीने में 747 महिलाओं को मिला एफसीएम
गर्भवती महिलाओं में एनीमिया के उपचार के लिए एफसीएम की पहुंच लगातार बढ़ी है। मई से अगस्त के बीच कहर ब्लॉक समेत बिलग्राम, हरपालपुर, पिहानी और संडीला में कुल 747 महिलाओं को एफसीएम दिया गया। मई में 19, जून में 140, जुलाई में 303 और अगस्त में 285 महिलाओं को यह उपचार मिला।
ब्लॉकवार आंकड़ों में पिहानी में 271, संडीला में 213, हरपालपुर में 175 और बिलग्राम में 88 महिलाओं को एफसीएम दिया गया।
अब तक नहीं सामने आया कोई प्रतिकूल प्रभाव
जिला महिला स्वास्थ्य परामर्शदाता माही ने बताया कि एफसीएम लेने वाली महिलाओं की उपचार के बाद लगातार निगरानी की जा रही है। अब तक किसी भी महिला में एफसीएम दिए जाने के बाद कोई प्रतिकूल प्रभाव सामने नहीं आया है।
समय पर जांच और उपचार जरूरी
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. भवनाथ पांडे ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान एनीमिया की नियमित जांच और समय पर उपचार मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। पायलट परियोजना के तहत जिले के चार ब्लॉकों में एफसीएम की सुविधा शुरू की गई है। चिकित्सकीय आकलन और निर्धारित पात्रता के आधार पर जरूरतमंद महिलाओं को एफसीएम दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि उपचार के बाद हीमोग्लोबिन की दोबारा जांच कर महिला के स्वास्थ्य में सुधार की निगरानी की जाती है। सुमन और सविता जैसे मामलों में समय पर जांच और उचित उपचार से हीमोग्लोबिन में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। चार महीनों में 747 महिलाओं तक एफसीएम की पहुंच स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों की बढ़ती पहुंच को दर्शाती है।




