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हृदय रोगों की रोकथाम पर प्रदेश भर के विशेषज्ञों ने किया मंथन

– कोलेस्ट्राल व बीपी को रखे संतुलित, नही तो हो सकता है हदयघात – एआई मददगार,लेकिन उसे डाक्टर न समझे – कार्डियो विशेषज्ञ – सभी को एक बार अपनी एलपीए की जांच जरूर करानी चाहिए हरी शंकर शर्मा कानपुर। परिवार में अगर किसी को हदय रोग कि बीमारी रही हेागी तो उसकी आने वाली पीढ़ी भी जेनेटिक रूप से इस बीमारी का शिकार हो सकती है। जीन में ही हदय रोग की बीमारी का रहस्य छुपा हुआ है। अगर समय रहते (लिपोप्रोटीन ए) एलपीए की जांच करा ले तो हार्ट अटैक होने की संभावना औी कब हार्ट अटैक पड सकता है इसकी जानकारी मिलने में आसानी हो सकती है। हार्ट को कैसे स्वस्थ्य रखे और किस तरह से जीवन उशैली को अपनाये इनकी विषरूयों पर कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (उत्तर प्रदेश चौप्टर) के तत्वावधान में एलपीएस इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी कानपुर के हृदय रोग विभाग द्वारा मंधना बैराज रोड स्थित होटल इटर्निटी में एक दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन “कार्डियोप्रिवेंट 2026” का आयोजन किया गया। सम्मेलन का उद्घाटन एसजीपीजीआई लखनऊ के कार्डियोलॉजी विभाग के एचओडी एवं प्रदेश के पहले कार्डियोलॉजी सोसाइटी ऑफ इंडिया (उ.प्र. चौप्टर) के चेयरमैन प्रो. डॉ सत्येन्द्र तिवारी, कार्डियोलॉजी के निदेशक (प्रो.) डॉ राकेश वर्मा , आयोजन अध्यक्ष डॉ उमेश्वर पाण्डेय, आयेजन सचिव डॉ अवधेश शर्मा ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। सम्मेलन का विषय था “विज्ञान से कार्य तकः हृदय रोग रोकथाम का भविष्य” जिस पर 9 वैज्ञानिक सत्रों में 34 व्याख्यान प्रस्तुत किए गए। इस सम्मेलन में लखनऊ, वाराणसी, अलीगढ़, मेरठ, नई दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और रांची सहित देश-प्रदेश के प्रमुख हृदय रोग विशेषज्ञों ने भाग लिया और अपना व्यख्यान प्रस्तुत किया। सम्मेलन में प्रो. डॉ सत्येन्द्र तिवारी ने बताया कि पूरे भारत में 45 वर्ष से कम उर्म्र के लगभग 20 प्रतिशत लोग हदय रोग की बीमारी से ग्रस्ति हो रहे है। उन्होंने बताया कि हार्ट अटैक होने का मुख्य कारण ब्लाकेज का होना होता है। अगर 50 फीसदी से ज्यादा ब्लाकेज हो गया तो हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। इन ब्लाकेजो के बढ़ने में तनाव, मोटापा, डायबिटीज, धू्रमपान, कोलेस्ट्राल और बीपी मुख्य कारण होते है। जीवन शैली को अगर सही पटरी पर नही लाया गया तो हदयघात होने का खतरा काफी बढ़ जाता हे। इस बीमारी का लक्षण भी पता नही चलता है। उन्होंने बताया कि 2000 लोगो पर शोध के दौरान पाया गया कि 10 फीसदी लोगो में हदय की बीमारी अनुवांशिक (जेनेटिक) होती है जबकि 20 फीसदी हदय की बीमारी 40 वर्ष से कम उम्र के लोागे में पाई गई। उन्होंने आमजन मानस से अपील की है कि वह अपने दिल को संभालक र रखे। जीवन शैली में सुधार लाने के साथ ही बीपी , डायबिटीज और तनाव को कम रखे ताकि आपका दिल आपके साथ लम्बा समय गुजार सके। इस दौरान सम्मेलन के संरक्षक डॉ. राकेश वर्मा, आयोजन अध्यक्ष डॉ. उमेश्वर पाण्डेय, सह-अध्यक्ष डॉ. संतोष सिन्हा, संयुक्त आयोजन सचिव डॉ. एम. एम. रज़ी, कोषाध्यक्ष डॉ. मोहित सचान तथा वैज्ञानिक समिति के अध्यक्ष डॉ. मुकेश झा रहे। इस अवसर पर प्रदेश के अनेक वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ उपस्थित रहे। पुरूषो के साथ महिलाओ में भी हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा लखनऊ के केजीएमसी से आए कार्डियोलॉजिस्ट डॉ अक्षय प्रधान ने बताया कि हार्ट की बीमारी महिलाओं की अपेक्षाकृत पुरूषो में ज्यादा देखने को मिलती है। 15 से 40 साल तक महिलाओ में हार्ट की कोई भी बीमारी जल्दी नही होती क्यों कि उनके अन्दर पाये जाने वाला जीन हार्ट डिसीज को संभालता है। अगर कोलेस्ट्राल बढ़ा हो तो उसकी नियमित दवा लेनी जरूरी है क्यो कि अक्सर देखा गया है, कि अधिकांश लोग कोलेस्ट्राल के सामान्य होते ही दवा लेना छोड देते है जिससे आगे चल कर हदयघात होने का पूरा खतरा बना रहता है। उन्होंने बताया कि ऐसे मरीजो को जीवन भर दवा लेनी पडती है और वह भी नियमित रूप से। वहीं शोध करने पर एक नया इंजेक्शन (इंक्लसीरान) लांच हुआ है जोकि साल में दो बार लगवाया जाता है, जिससे कोलेस्ट्राल सामान्य बना रहता है। लेकिन यह इंजेक्शन काफी महंगा आता है जिजसकी बाजार में कीमत लगभग 80 से 90 हजार रूपये प्रति इंजेक्शन है। अब तक भारत में दो से तीन हजार मरीजो ने इस इंजेक्शन को लगवाया है। यह इंजेक्शन तब लगवाया जाता है जब एलडीएल यानी बेड कोलेस्ट्राल दवा लेने के बाद भी जब कम नही होता है। वायु प्रदूषण भी बढ़ाता है हदय रोग का खतरा राम मनोहर लोहिया दिल्ली से आए डॉ पुनीत अग्रवाल ने बताया कि वायु प्रदूषण भी हदय रोग को बढ़ाने का काम करता है। वायु प्रदूषण में रहना मतलब कि पूरे दिन में एक डिब्बी सिगरेट पीने के बराकर है जो कि फेफडो के साथ हदयघात भी करता है। इसके साथ ही मोटापा और डायबिटीज भी इसका मुख्य कारण है। एआई मददगार ,लेकिन डॉटर नही जम्मू कश्मीर से आए कार्डियोलाजिस्ट डॉ नजीव उल्ला सूफी ने बताया कि एआई हदय रोग बताने में सहायक जरूर है ,लेकिन इसे डाक्टर के रूप में नही लेना चाहिए। एप्पल जैसी आधुनिक घडी बीपी और पल्स को नियमित बता रहती है। अगर बीपी 120/80 है तो अब इसे भी ज्यादा माना गया है। इससे कम बीपी का होना ही नार्मल की रेणी में रखा गया है। अक्सर देखा गया है कि लोग एआई से सवाल पूछ कर खुद दवा लेना श्ुारू कर देते है जिससे उनको बीमारी का सही अंदाजा नही लगता और वह अपनी बीमारी को और ज्यादा गंभीर बना लेते है। ऐसे में हदय रोग विशेषज्ञ से जरूर सलाह ले। आम जनता के लिए मुख्य संदेशः सम्मेलन में विशेषज्ञों ने मोटापा, उच्च रक्तचाप, अधिक नमक का सेवन, खरटि व नींद की समस्या, गंगा के मैदानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण, युवाओं में बढ़ते हृदयाघात, जिम व मैराथन के दौरान अचानक मृत्यु तथा बच्चों में रूमेटिक हृदय रोग जैसे विषयों पर जागरूकता की आवश्यकता बताई। साथ ही हृदयाघात के बाद कार्डियक रिहैबिलिटेशन को भारत में सबसे कम अपनाया जाने वाला, लेकिन अत्यंत प्रभावी उपचार बताया गया।

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