– बड़ी पथरी को छोटे टुकड़ों में तोडकर ई०आर०सी०पी० विधि से किया गया साफ
कानपुर। 90 वर्ष की बुजुर्ग महिला पेट में दर्द व पीलिया की बीमारी से ग्रसित थी। इसके साथ ही पिछले कुछ दिनों से तेज ठंड लगकर काफी दिनों से बुखार आ रहा था। इन समस्याओं के साथ मरीज के परिजन जी०एस०वी०एस०पी०जी०आई० कानपुर के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ० विनय कुमार की ओ०पी०डी० में लेकर आये। महिला की स्थिति को देखते हुए डॉ विनय कुमार ने बुजुर्ग महिला को सेामवार को भर्ती कर लिया। जाँचों के बाद पता लगा कि मरीज के पित्त की नली में 2 सेमी की बड़ी पथरी फंसी हुई है। जिसकी वजह से पीलिया व मवाद बनना शुरू हो गया था। मरीज की उम्र अधिक होने के कारण मरीज ऑपरेशन के लिए उपयुक्त नहीं थी।
मरीज का इलाज बिना ऑपरेशन के स्पाई ग्लास इण्डोस्कोप व इलेक्ट्रो हाइड्लोइक लिथोट्रिप्सी की विधि द्वारा करने का निर्णय लिया गया। बुधवार को डॉ० विनय कुमार (विभागाध्यक्ष), डॉ धु्रव ठाकुर, एवं डॉ० सत्यम कुमार सिंह की टीम द्वारा इस विधि में पित्त की नली में फंसी बड़ी पथरी को छोटे टुकड़ों में तोडकर ई०आर०सी०पी० विधि से साफ कर दिया गया। इस विधि द्वारा इलाज करने में 30 मिनट का समय लगा। मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार हो रहा है। इस जटिल प्रक्रिया द्वारा महिला की जान बचाने के लिए डॉ० संजय काला (प्राचार्य) ने गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के समस्त टीम को बधाई दी।
क्या है स्पाई ग्लास इण्डोस्कोपी
स्पाई ग्लास इण्डोस्कोपी प्रक्रिया में एक बेहद पतली और लचीली ट्युब के आगे कैमरा लगा होता है, जिसे पित्त की नलिकाओं के अंदर सीधे डालकर अंदर की स्पष्ट तस्वीरें ली जाती हैं। इसे अक्सर ई०आर०सी०पी० प्रक्रिया के साथ किया जाता है।
गैस्ट्रोएंटरोलॉजी किस तरह से है उपयोगी
गैस्ट्रोएंटरोलॉजी डॉ विनय कुमार ने बताया कि स्पाई ग्लास इण्डोस्कोपी विधि से पित्त की पथरीः नलिकाओं में फंसी बड़ी पथरी का सटीक पता लगाने और लेजर व इलेक्ट्रो हाइड्लोइक लिथोट्रिप्सी की मदद से उन्हें छोटे टुकडों में तोड़कर निकालने के लिए, कैंसर या ट्यूमर पित्त नली के कैंसर (कोलांजियोकार्सिनोमा) की पहचान करने और टयुमर का सटीक स्थान जानने के लिए, पित्त नलीं में संकुचनः पित्त नलिकाओं के सिकुड़ने या बंद होने के कारणों का पता लगाने और वहां स्टेंट डालने के लिए, बायोप्सीः नलिकाओं के अंदरूनी हिस्से से उतक का नमूना लेने के लिए बहुत ही उपयोगी है।




