सोनीपत, राजेश आहूजा | वेब वार्ता
डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों से बचाव को लेकर सोनीपत स्थित ज्ञान गंगा ग्लोबल स्कूल (जी-3) में सीबीएसई के सहयोग से “साइबर सेफ्टी एंड सिक्योरिटी” विषय पर इन-हाउस ट्रेनिंग प्रोग्राम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के 54 शिक्षकों ने भाग लिया। स्कूल की प्राचार्या गीता चोपड़ा ने कहा कि साइबर अपराध से बचाव का सबसे बड़ा और प्रभावी हथियार जागरूकता है।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ स्कूल की प्राचार्या गीता चोपड़ा, उप-प्राचार्या रूना दास एवं सीबीएसई के रिसोर्स पर्सन अमित दहिया द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। इस दौरान शिक्षकों को डिजिटल दुनिया में बढ़ते खतरों और उनसे बचाव के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी गई।
डिजिटल सुविधाओं के साथ बढ़ा साइबर अपराध का खतरा
प्राचार्या गीता चोपड़ा ने कहा कि ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स ने जीवन को आसान बनाया है, लेकिन इसके साथ ही साइबर अपराधियों की गतिविधियां भी तेजी से बढ़ी हैं। डाटा चोरी, अकाउंट हैकिंग, फर्जी वेबसाइट, फिशिंग ईमेल और फेक कस्टमर केयर कॉल के जरिए आम लोग ठगी का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि थोड़ी सी लापरवाही भी मेहनत की कमाई को खतरे में डाल सकती है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम की प्रमुख जानकारी
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| कार्यक्रम का विषय | साइबर सेफ्टी एंड सिक्योरिटी |
| प्रतिभागी शिक्षक | 54 |
| रिसोर्स पर्सन | अमित दहिया (सीबीएसई) |
| साइबर हेल्पलाइन | 1930 |
अज्ञात लिंक और पब्लिक वाई-फाई से रहें सतर्क
सीबीएसई के रिसोर्स पर्सन अमित दहिया ने कहा कि डिजिटल इंडिया के साथ इंटरनेट यूजर्स की संख्या तो बढ़ी है, लेकिन साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूकता अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाई है। उन्होंने शिक्षकों को अज्ञात लिंक पर क्लिक न करने, सोशल मीडिया पर निजी जानकारी साझा न करने और पब्लिक वाई-फाई के उपयोग में सावधानी बरतने की सलाह दी।
- फिशिंग ईमेल और फर्जी वेबसाइट से सावधान रहें
- अनजान कॉल और मैसेज पर निजी जानकारी साझा न करें
- संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें
- ऑनलाइन फ्रॉड की स्थिति में 1930 हेल्पलाइन का उपयोग करें
शिक्षकों के माध्यम से समाज तक पहुंचेगा संदेश
प्राचार्या गीता चोपड़ा ने कहा कि प्रशिक्षित शिक्षक अब बच्चों के माध्यम से साइबर सुरक्षा का संदेश समाज तक पहुंचाएंगे। इससे न केवल छात्र, बल्कि अभिभावक और आम नागरिक भी डिजिटल अपराधों से सतर्क रह सकेंगे।
निष्कर्ष
साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों के बीच इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम समय की आवश्यकता हैं। जागरूकता, सतर्कता और सही जानकारी ही डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहने का मजबूत आधार बन सकती है। शिक्षकों की भूमिका इस दिशा में बेहद महत्वपूर्ण है।
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