सरिस्का टाइगर हैबिटेट पर सियासत तेज: नेता प्रतिपक्ष जूली ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

जयपुर/अलवर, डेस्क | वेब वार्ता

राजस्थान में सरिस्का टाइगर रिजर्व के क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट (CTH) को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार संरक्षित क्षेत्र के साथ छेड़छाड़ कर रही है। उन्होंने इसे पर्यावरण विरोधी कदम बताते हुए कहा कि इससे वन्यजीव संरक्षण के दावे कमजोर पड़ते हैं और बाघों के अस्तित्व पर खतरा बढ़ सकता है।

खदानों और रिसॉर्ट्स को लाभ पहुंचाने का आरोप

टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि सरकार सुनियोजित तरीके से CTH क्षेत्र को बफर जोन में बदलने की कोशिश कर रही है। उनका दावा है कि इससे सुप्रीम कोर्ट द्वारा बंद की गई 104 खदानों और करीब 100 रिसॉर्ट्स को फिर से शुरू करने का रास्ता तैयार किया जा रहा है। उन्होंने इसे कुछ चुनिंदा लोगों को फायदा पहुंचाने की साजिश करार दिया।

बाघों की संख्या और क्षेत्र पर आंकड़े

विवरणस्थिति
बाघों की संख्या (पूर्व)लगभग 40
वर्तमान संख्या52
बंद खदानें104
रिसॉर्ट्सकरीब 100

जूली ने कहा कि केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) की रिपोर्ट में भी सरिस्का टाइगर प्रोजेक्ट के CTH के युक्तिकरण का उल्लेख है। ऐसे में जब बाघों की संख्या बढ़ रही है, तो संरक्षित क्षेत्र को मजबूत किया जाना चाहिए, न कि सीमित किया जाए।

  • बाघों की बढ़ती संख्या के बावजूद क्षेत्र घटाने का आरोप
  • महत्वपूर्ण विचरण क्षेत्र को बाहर करने की आशंका
  • जैव विविधता पर खतरे की चेतावनी

पारदर्शिता की कमी पर सवाल

नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने इस प्रस्ताव को लेकर कोई प्रारूप अधिसूचना जारी नहीं की और न ही जनता, विशेषज्ञों या अन्य हितधारकों से सुझाव लिए। उन्होंने इसे पारदर्शिता की कमी और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की अनदेखी बताया।

कानूनी पालन और मांग

जूली ने मांग की कि सर्वोच्च न्यायालय के 8 सितंबर 2025 के फैसले का पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 38-V के तहत पूर्ण पारदर्शिता के साथ CTH की सीमाओं का पुनर्निर्धारण किया जाए, ताकि सरिस्का के बाघों और उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

संघर्ष की चेतावनी

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस मुद्दे पर अपनी मंशा स्पष्ट नहीं की, तो कांग्रेस पार्टी इस जनहित के मुद्दे पर सड़क से सदन तक आंदोलन करेगी। यह मामला अब पर्यावरण संरक्षण बनाम विकास की बहस के केंद्र में आ गया है।

निष्कर्ष

सरिस्का टाइगर रिजर्व को लेकर उठे इस विवाद ने राज्य की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। जहां एक ओर सरकार पर आरोप लगाए जा रहे हैं, वहीं पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी सामने है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर राजनीतिक और कानूनी बहस और तेज हो सकती है।


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