जयपुर, 16 मई (वेब वार्ता)। राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राजस्थान यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव 2025-26 से जुड़े मामले में बड़ा अंतरिम आदेश जारी करते हुए एकलपीठ द्वारा दिए गए व्यापक दिशा-निर्देशों की क्रियान्विति पर रोक लगा दी है। जस्टिस सुदेश बंसल और जस्टिस मनीष शर्मा की खंडपीठ ने राज्य सरकार की विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।
खंडपीठ ने एकलपीठ के 19 दिसंबर 2025 के आदेश के पैरा 45 से 58 तक दिए गए निर्देशों के संचालन को अगली सुनवाई तक स्थगित कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने छात्र जयराव सहित अन्य संबंधित पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
यह मामला राजस्थान यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव बहाल करवाने की मांग से जुड़ा हुआ है। छात्र जयराव और अन्य की ओर से दायर याचिका में सत्र 2025-26 के छात्रसंघ चुनाव करवाने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान एकलपीठ ने चुनाव करवाने के अलावा राज्य सरकार, विश्वविद्यालय प्रशासन और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कई व्यापक दिशा-निर्देश जारी कर दिए थे।
एकलपीठ ने अपने आदेश में सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्रसंघ चुनावों के संचालन के लिए “स्टूडेंट यूनियन इलेक्शन बोर्ड” अथवा समिति गठित करने के निर्देश दिए थे। साथ ही अदालत ने प्रत्येक शैक्षणिक सत्र के मार्च माह में चुनाव कैलेंडर जारी करने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को भी कहा था, ताकि शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित न हों।
अदालत ने यह सुझाव भी दिया था कि चुनाव कैलेंडर जारी होने के बाद उसे बिना उचित कारण बदला न जाए। इन निर्देशों को लेकर राज्य सरकार ने आपत्ति जताते हुए खंडपीठ में विशेष अपील दायर की थी।
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद ने दलील दी कि मूल याचिका केवल राजस्थान यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ चुनाव करवाने तक सीमित थी, लेकिन एकलपीठ ने उससे आगे बढ़कर जनहित से जुड़े व्यापक आदेश जारी कर दिए। उन्होंने कहा कि यदि अदालत को मामला जनहित का प्रतीत होता था तो इसे स्वतः संज्ञान लेकर जनहित याचिका के रूप में दर्ज किया जाना चाहिए था।
सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि मामले में चुनाव आयोग को पक्षकार नहीं बनाया गया था, इसके बावजूद उसे निर्देश जारी किए गए। इसके अलावा राज्य में 50 से अधिक विश्वविद्यालय संचालित हैं और एकलपीठ के आदेश का प्रभाव सभी विश्वविद्यालयों पर पड़ता, जो मूल याचिका के दायरे से बाहर है।
खंडपीठ ने राज्य सरकार की दलीलों को गंभीरता से लेते हुए फिलहाल एकलपीठ के निर्देशों पर रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद प्रदेश में छात्रसंघ चुनावों को लेकर राजनीतिक और शैक्षणिक हलचल तेज हो गई है। छात्र संगठन नियमित चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं पर मंथन कर रहे हैं।




