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‘वॉच एंड अर्न’ के नाम पर साइबर ठगी का जाल, भोपाल पुलिस ने जारी की चेतावनी

भोपाल, 15 जून (वेब वार्ता)। यदि आपके मोबाइल पर भी यूट्यूब वीडियो लाइक करने, गूगल पर रेटिंग देने या रील्स देखने के बदले प्रतिदिन हजारों रुपये कमाने का संदेश आया है, तो सतर्क हो जाइए। यह अतिरिक्त कमाई का अवसर नहीं, बल्कि आपकी मेहनत की कमाई हड़पने के लिए साइबर ठगों द्वारा बिछाया गया एक खतरनाक डिजिटल जाल हो सकता है। राजधानी भोपाल में ऐसे मामलों में लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए साइबर अपराध शाखा ने नागरिकों के लिए विशेष परामर्श जारी कर सावधान रहने की अपील की है।

साइबर पुलिस के अनुसार, ठग सबसे पहले व्हाट्सऐप और टेलीग्राम जैसे माध्यमों से लोगों से संपर्क करते हैं। उन्हें बताया जाता है कि केवल यूट्यूब वीडियो देखने, पोस्ट पसंद करने, रेटिंग देने या कुछ अनुप्रयोग डाउनलोड करने जैसे आसान कार्य करके प्रतिदिन दो हजार से पांच हजार रुपये तक कमाए जा सकते हैं। कम मेहनत में अधिक कमाई का लालच देकर लोगों को अपने जाल में फंसाया जाता है।

भरोसा जीतने के लिए भेजते हैं शुरुआती भुगतान

पुलिस ने बताया कि शुरुआत में पीड़ित से दो या तीन छोटे कार्य करवाए जाते हैं। इसके बदले ठग उसके खाते में 50, 100 या 200 रुपये, जबकि कुछ मामलों में इससे अधिक राशि भी भेज देते हैं। वास्तविक भुगतान मिलने के बाद लोगों को यह भरोसा हो जाता है कि काम पूरी तरह वैध है और यहीं से ठगी का सिलसिला शुरू होता है।

‘विशेष कार्य’ और निवेश के नाम पर लगाते हैं चूना

जब ठगों को लगता है कि सामने वाला व्यक्ति पूरी तरह भरोसा कर चुका है, तब उसे तथाकथित ‘विशेष कार्य’, ‘प्रीमियम योजना’ या डिजिटल मुद्रा में निवेश का लालच दिया जाता है। अधिक लाभ कमाने की उम्मीद में लोग पंजीकरण शुल्क, सुरक्षा राशि या निवेश के नाम पर हजारों से लेकर लाखों रुपये तक ठगों द्वारा बताए गए खातों में जमा कर देते हैं। रकम मिलते ही ठग संपर्क तोड़ देते हैं, समूह से बाहर कर देते हैं और मोबाइल नंबर बंद कर देते हैं।

भोपाल साइबर पुलिस ने जारी की सुरक्षा सलाह

साइबर अपराध शाखा ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान कंपनी या व्यक्ति द्वारा भेजे गए ऑनलाइन नौकरी और अंशकालिक कार्य के प्रस्तावों पर बिना जांच-पड़ताल के भरोसा न करें। यदि कोई संस्था काम शुरू करने से पहले पंजीकरण शुल्क, सुरक्षा जमा या किसी अन्य नाम पर पैसे जमा करने को कहे, तो उसे तुरंत धोखाधड़ी समझें और उससे दूरी बना लें।

पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि बैंक खाते की जानकारी, यूपीआई पिन, एटीएम पिन, पासवर्ड और मोबाइल पर प्राप्त एकबारगी गोपनीय कूटांक जैसी संवेदनशील जानकारियां किसी भी अज्ञात व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। ऐसी छोटी सी लापरवाही भारी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है।

ठगी का शिकार होने पर तुरंत करें शिकायत

यदि कोई व्यक्ति अनजाने में इस प्रकार की साइबर ठगी का शिकार हो जाता है और उसके खाते से धनराशि निकल जाती है, तो उसे बिना समय गंवाए तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए। इसके अलावा राष्ट्रीय साइबर अपराध शिकायत पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। समय रहते शिकायत दर्ज कराने से ठगी गई राशि वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

भोपाल साइबर पुलिस का कहना है कि डिजिटल युग में सतर्कता ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है। आसान कमाई के लालच में उठाया गया एक गलत कदम जीवनभर की बचत को खतरे में डाल सकता है। इसलिए किसी भी आकर्षक प्रस्ताव को स्वीकार करने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें।

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