कुरुक्षेत्र, 10 जून (वेब वार्ता)। कुरुक्षेत्र जिला अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ के साथ विवाद के बाद हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेनू भाटिया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पत्र भेजकर अपना त्यागपत्र सौंपते हुए इसे स्वीकार करने का अनुरोध किया है। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति और स्वास्थ्य व्यवस्था दोनों में चर्चा का विषय बना दिया है।
मामले की शुरुआत रविवार को हुई, जब कुरुक्षेत्र जिला अस्पताल में एक नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म के मामले की जांच के लिए रेनू भाटिया एलएनजेपी अस्पताल पहुंची थीं। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी और प्रधान चिकित्सा अधिकारी को फटकार लगाई थी।
इसी दौरान नर्सिंग स्टाफ से बातचीत करते हुए रेनू भाटिया ने कहा था कि क्या कोई अपनी बेटी को इस तरह किसी चिकित्सक के पास अकेला छोड़ सकता है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया था कि यदि ऐसी घटना उनके अपने परिवार के साथ होती तो क्या उनका रवैया यही रहता। उनके इस बयान को नर्सिंग कर्मियों ने आपत्तिजनक और अपमानजनक बताया।
रेनू भाटिया की टिप्पणी के विरोध में मंगलवार को पूरे हरियाणा में नर्सिंग स्टाफ ने दो घंटे की सांकेतिक हड़ताल की। प्रदर्शन कर रहे नर्सिंग कर्मचारियों ने उनसे सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और महिला आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की मांग की थी।
हालांकि दिनभर चले घटनाक्रम के दौरान रेनू भाटिया अपने बयान पर कायम रहीं और उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने पीड़िता के प्रति संवेदनशीलता के आधार पर अपनी बात रखी थी। प्रारंभिक तौर पर उन्होंने न तो माफी मांगने के संकेत दिए और न ही इस्तीफा देने की बात स्वीकार की थी।
लेकिन देर शाम राजनीतिक घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया। रेनू भाटिया ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को अपना इस्तीफा भेज दिया और उसे स्वीकार करने का अनुरोध किया। हालांकि समाचार लिखे जाने तक मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इस्तीफे को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
इस घटनाक्रम ने स्वास्थ्य सेवाओं में कार्यरत कर्मचारियों की गरिमा, संवेदनशील मामलों में सार्वजनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों की भाषा और जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजर मुख्यमंत्री के निर्णय पर टिकी हुई है कि वह रेनू भाटिया का इस्तीफा स्वीकार करते हैं या नहीं।
उल्लेखनीय है कि नाबालिग से दुष्कर्म जैसे संवेदनशील मामले की जांच के दौरान दिए गए एक बयान ने कुछ ही दिनों में राज्य स्तर के बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया, जिसका परिणाम हरियाणा महिला आयोग की अध्यक्ष के इस्तीफे के रूप में सामने आया।




