सोनीपत (राजेश आहूजा) बिजली व्यवस्था के चरमराने से समूचे शहर में त्राहि-त्राहि मची हुई है। बत्ती गुल होने से आम जनजीवन पूरी तरह पटरी से उतर गया है और हर तबका बेहाल है। इस गंभीर संकट को लेकर कांग्रेस ने सीधे सत्ता पक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस के शहरी जिला अध्यक्ष कमल दिवान ने सरकार की नीतियों को जनविरोधी और तानाशाही करार देते हुए तीखा प्रहार किया है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अपनी हठधर्मिता छोड़कर बिजली कर्मचारियों की मांगें नहीं मानीं, तो जनता का यह गुस्सा सड़कों पर फूटेगा और सरकार के लिए इसे संभालना नामुमकिन हो जाएगा।
कमल दिवान ने जमीनी हकीकत बयां करते हुए कहा कि बिजली बाधित होने से समाज का प्रत्येक वर्ग पिस रहा है। छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों, टेलरिंग, वेल्डिंग और लेथ मशीनों से पेट पालने वाले मध्यम वर्गीय कामगारों का धंधा पूरी तरह ठप हो चुका है। रोज़ कमाकर रोज़ खाने वालों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। वहीं, घरों में पानी की आपूर्ति रुक जाने से महिलाओं और बुजुर्गों को भारी फजीहत का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों की पढ़ाई चौपट है और इनवर्टर जवाब दे चुके हैं। सरकार की इस नाकामी ने लोगों की दैनिक दिनचर्या को नरक बना दिया है।
शहरी जिला अध्यक्ष कमल दिवान ने कहा कि बिजली का निजीकरण केवल कुछ पूंजीपति मित्रों को लाभ पहुंचाने का तानाशाही षड्यंत्र है। सरकार अपनी मनमानी से जनता और कर्मचारियों दोनों पर जुल्म ढा रही है। अपनी नाकामी छुपाने के लिए तंत्र को निजी हाथों में सौंपने की जिद जनता पर सजा बनकर टूट रही है। यह सरकार की हठधर्मिता ही है कि जनहित से जुड़े इतने बड़े मुद्दे पर सत्ताधारी आंखें मूंदे बैठे हैं।
कमल दिवान ने सरकार को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि जब महज दो दिनों के भीतर शहर में ऐसा हाहाकार मच गया है, तो तीसरे दिन स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो जाएगी। जनता का सब्र टूट रहा है और उनका गुस्सा कभी भी उग्र रूप अख्तियार कर सकता है। अगर हालात बदतर होते हैं, तो उसकी पूरी जवाबदेही सरकार और स्थानीय प्रशासन की होगी। सरकार भ्रम में न रहे, जनता का यह आक्रोश सत्ता के तख्त को हिलाने के लिए काफी है।
कमल दिवान ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हर कदम पर आम जनता और कर्मचारियों के हक की लड़ाई लड़ती रही है और आगे भी लड़ेगी। कांग्रेस शासन में हमेशा जनभावनाओं और कर्मचारियों के अधिकारों को सर्वोपरि रखा गया है, जबकि वर्तमान हुकूमत केवल दमन की नीति जानती है। दीवान ने पुरजोर मांग की कि सरकार अविलंब निजीकरण का आत्मघाती फैसला वापस ले, हड़ताली कर्मचारियों की न्यायसंगत मांगों को माने और तुरंत प्रभाव से बिजली आपूर्ति बहाल कर जनता को इस असहनीय संकट से मुक्ति दिलाए।




