लंदन, 10 जुलाई (वेब वार्ता)। टी-20 विश्व कप जीतने के कुछ ही महीनों बाद टीम इंडिया लगातार खराब प्रदर्शन से जूझ रही है। पहले आयरलैंड के खिलाफ श्रृंखला गंवाने के बाद अब इंग्लैंड दौरे पर भी टीम अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी है। नॉटिंघम में मिली 125 रन की बड़ी हार के बाद टीम की बल्लेबाजी, गेंदबाजी, कप्तानी और चयन नीति पर सवाल उठने लगे हैं।
टी-20 विश्व कप 2026 के बाद टीम इंडिया में कई बड़े बदलाव किए गए। श्रेयस अय्यर को नया कप्तान बनाया गया, जबकि सूर्यकुमार यादव, हार्दिक पंड्या और जसप्रीत बुमराह जैसे अनुभवी खिलाड़ियों की अनुपस्थिति में टीम नए संयोजन के साथ मैदान में उतरी। मुख्य कोच गौतम गंभीर युवा खिलाड़ियों के साथ नई टीम तैयार करने की दिशा में काम कर रहे हैं, लेकिन लगातार मिल रही हार ने इस प्रक्रिया पर भी चर्चा तेज कर दी है।
श्रेयस अय्यर का व्यक्तिगत प्रदर्शन भी उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा। हाल की पारियों में वह बड़ी और निर्णायक पारी खेलने में लगातार सफल नहीं हो सके। वहीं, कप्तानी के दौरान लिए गए कुछ निर्णयों पर भी सवाल उठे हैं। बल्लेबाजी क्रम में लगातार बदलाव के कारण खिलाड़ियों की भूमिकाएं भी स्पष्ट नहीं हो पा रही हैं।
इंग्लैंड और आयरलैंड की सीम तथा स्विंग वाली परिस्थितियों में भारतीय बल्लेबाज खुद को पूरी तरह ढालने में असफल रहे। घरेलू प्रतियोगिताओं में सफल रही आक्रामक बल्लेबाजी की रणनीति विदेशी परिस्थितियों में प्रभावी साबित नहीं हुई। ईशान किशन और अभिषेक शर्मा ने कुछ उपयोगी पारियां खेलीं, लेकिन निरंतरता बनाए रखने में सफल नहीं रहे।
टीम चयन को लेकर भी क्रिकेट विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं। संजू सैमसन को लगातार तीन असफल पारियों के बाद टीम से बाहर कर दिया गया, जबकि उनकी जगह शामिल किए गए युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी अब तक बड़ी पारी नहीं खेल सके हैं। इससे चयन प्रक्रिया पर भी बहस तेज हो गई है।
गेंदबाजी विभाग में अनुभवी खिलाड़ियों की कमी स्पष्ट दिखाई दी। जसप्रीत बुमराह और हार्दिक पंड्या जैसे खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी से टीम का संतुलन प्रभावित हुआ। युवा गेंदबाजों को अवसर तो मिले, लेकिन दबाव वाले मुकाबलों में अनुभव की कमी साफ नजर आई।
क्रिकेट विश्लेषकों का मानना है कि टी-20 विश्व कप विजेता भारतीय टीम की सबसे बड़ी ताकत परिस्थितियों के अनुसार अपनी रणनीति बदलने की क्षमता थी। मौजूदा टीम आक्रामक शैली में खेलने का प्रयास कर रही है, लेकिन विदेशी परिस्थितियों के अनुरूप अपने खेल में आवश्यक बदलाव नहीं कर पा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भारतीय टीम को जीत की राह पर लौटना है तो केवल नए खिलाड़ियों पर भरोसा करना पर्याप्त नहीं होगा। इसके साथ स्पष्ट रणनीति, संतुलित टीम चयन और परिस्थितियों के अनुसार खेल में लचीलापन भी आवश्यक होगा।




