नई दिल्ली, 10 जुलाई (वेब वार्ता)। देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज होने के कारण आने वाले महीनों में खाद्य पदार्थों की कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून में जल्द सुधार नहीं हुआ तो सब्जियों, दालों और चावल जैसी आवश्यक खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे इनके दाम बढ़ सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, टमाटर, प्याज, हरी सब्जियां और अन्य शीघ्र खराब होने वाली फसलें मौसम में बदलाव से सबसे अधिक प्रभावित होती हैं। पर्याप्त वर्षा नहीं होने पर इन फसलों का उत्पादन और बाजार में आपूर्ति घट सकती है, जिससे अगले कुछ सप्ताह में इनके दामों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि खरीफ मौसम की बुवाई प्रभावित होती है और फसलों को पर्याप्त वर्षा नहीं मिलती, तो चावल और दालों के उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में भविष्य में इनकी कीमतों में वृद्धि की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
इस वर्ष मानसून की शुरुआत अपेक्षित स्तर पर नहीं रही है और कई क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आगामी दिनों में वर्षा की स्थिति में सुधार नहीं होता, तो खेती और उत्पादन पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। उत्पादन में कमी आने से बाजार में आपूर्ति घटेगी और मांग के मुकाबले उपलब्धता कम होने पर कीमतों में वृद्धि हो सकती है।
अर्थशास्त्रियों के अनुसार, खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर खुदरा महंगाई पर भी पड़ता है। सब्जियां, दालें और अनाज महंगे होने से घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ बढ़ सकता है और महंगाई दर में भी वृद्धि दर्ज की जा सकती है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल घबराकर आवश्यकता से अधिक खाद्य सामग्री खरीदने की जरूरत नहीं है। यदि आने वाले दिनों में मानसून सामान्य हो जाता है, तो स्थिति में सुधार संभव है। लोगों को मौसम और बाजार की स्थिति पर नजर रखते हुए आवश्यकतानुसार ही खरीदारी करने की सलाह दी जा रही है।




