लंदन, 10 जुलाई (वेब वार्ता)। इंग्लैंड दौरे पर भारतीय क्रिकेट टीम का प्रदर्शन उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। कप्तान श्रेयस अय्यर के नेतृत्व में खेल रही भारतीय टीम पांच मैचों की टी-20 श्रृंखला में शुरुआती चार मुकाबलों के बाद 3-0 से पिछड़ गई है। लगातार मिली हार के बाद टीम की बल्लेबाजी, गेंदबाजी और रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं। चौथे मुकाबले में नौ विकेट की हार ने भारतीय टीम की कई कमजोरियों को उजागर कर दिया।
श्रृंखला के दौरान भारतीय टीम के आठ खिलाड़ियों ने पहली बार इंग्लैंड की परिस्थितियों में टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले। इनमें अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा, प्रसिद्ध कृष्णा, शिवम दुबे, वाशिंगटन सुंदर, प्रिंस यादव, वैभव सूर्यवंशी और संजू सैमसन शामिल रहे। वहीं सूर्यांश शेडगे का यह राष्ट्रीय टीम के साथ पहला इंग्लैंड दौरा है।
हालांकि टीम में ऐसे खिलाड़ी भी मौजूद थे जिन्हें इंग्लैंड में खेलने का अनुभव था। कप्तान श्रेयस अय्यर, अक्षर पटेल, ईशान किशन, अर्शदीप सिंह और रवि बिश्नोई इससे पहले इंग्लैंड में टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके हैं। ऐसे में केवल अनुभव की कमी को हार का कारण मानना उचित नहीं माना जा रहा।
श्रृंखला में भारतीय शीर्ष क्रम पूरी तरह संघर्ष करता दिखाई दिया। सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा और वैभव सूर्यवंशी टीम को मजबूत शुरुआत देने में सफल नहीं रहे। ईशान किशन भी निरंतर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सके। इससे मध्यक्रम पर अतिरिक्त दबाव बना, जिसका असर पूरी बल्लेबाजी पर दिखाई दिया।
कप्तान श्रेयस अय्यर ने कुछ पारियों में उपयोगी योगदान दिया, लेकिन उन्हें दूसरे बल्लेबाजों का पर्याप्त साथ नहीं मिला। उपकप्तान तिलक वर्मा पूरी श्रृंखला में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सके। शिवम दुबे और अक्षर पटेल जैसे हरफनमौला खिलाड़ियों का योगदान भी उम्मीद के अनुरूप नहीं रहा, जिससे टीम का संतुलन प्रभावित हुआ।
गेंदबाजी विभाग में भी भारतीय टीम प्रभाव छोड़ने में असफल रही। युवा तेज गेंदबाज प्रिंस यादव ने सीमित अवसरों में संघर्ष किया, जबकि अनुभवी स्पिनर रवि बिश्नोई और वरुण चक्रवर्ती भी लगातार प्रभावी साबित नहीं हुए। अर्शदीप सिंह ने कुछ मौकों पर विकेट जरूर हासिल किए, लेकिन दूसरे छोर से उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।
विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय टीम की हार का मुख्य कारण सामूहिक प्रदर्शन में निरंतरता की कमी रही। शीर्ष क्रम की विफलता, मध्यक्रम का दबाव में बिखरना और गेंदबाजों का महत्वपूर्ण मौकों पर विकेट नहीं निकाल पाना टीम के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित हुआ। यदि भारतीय टीम को शेष मुकाबलों में वापसी करनी है तो बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में बेहतर तालमेल और निरंतर प्रदर्शन की आवश्यकता होगी।




