Monday, February 16, 2026
व्हाट्सएप पर हमसे जुड़ें

विश्व पुस्तक मेला: युवाओं का क्रेज, अंग्रेजी नॉवेल बने नए शिक्षक; भीड़ से प्रकाशक और साहित्यकार गदगद

नई दिल्ली, साहित्य डेस्क | वेब वार्ता

डिजिटल दौर और शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट के बढ़ते चलन के बीच अगर कोई चीज आज भी युवाओं को ठहरकर सोचने, समझने और सीखने का अवसर दे रही है, तो वह है किताब। भारत मंडपम में आयोजित विश्व पुस्तक मेला इस बात का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया है कि आज का युवा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि ज्ञान, भाषा और विचार की गहराई की भी तलाश कर रहा है। मेले में युवाओं की भारी मौजूदगी ने यह साबित कर दिया है कि पढ़ने की संस्कृति अभी खत्म नहीं हुई, बल्कि नए रूप में विकसित हो रही है।

अंग्रेजी नॉवेल बने युवाओं के नए शिक्षक

विश्व पुस्तक मेले में युवाओं के हाथों में अंग्रेजी नॉवेल, शॉर्ट स्टोरी कलेक्शन और बायोग्राफी साफ तौर पर दिखाई दे रही हैं। युवाओं का मानना है कि अंग्रेजी सीखने के लिए अब केवल क्लासरूम और ग्रामर की किताबें ही पर्याप्त नहीं हैं। अंग्रेजी उपन्यास न सिर्फ शब्दावली बढ़ाते हैं, बल्कि सोचने का नजरिया, संवाद शैली और आत्मविश्वास भी विकसित करते हैं। युवाओं का कहना है कि नॉवेल पढ़ते समय वे भाषा को रटते नहीं, बल्कि उसे महसूस करते हैं और जीते हैं।

क्लासिक से समकालीन साहित्य तक युवाओं की नजर

मेले में क्लासिक अंग्रेजी साहित्य से लेकर समकालीन लेखकों की किताबों तक युवाओं की दिलचस्पी साफ नजर आई। किरदारों की भावनाएं, संवादों की सहजता और कहानी की गति युवाओं को भाषा से जोड़ रही है। यही वजह है कि फिक्शन, नॉन-फिक्शन, आत्मकथाएं और प्रेरणादायक किताबों के स्टॉल पर युवाओं की भीड़ लगी रही।

  • अंग्रेजी नॉवेल से भाषा और आत्मविश्वास दोनों में सुधार
  • क्लासिक और मॉडर्न साहित्य में समान रुचि
  • पढ़ने को अनुभव बनाने की कोशिश

जब बुक स्टॉल भी कहानी कहने लगें

इस वर्ष विश्व पुस्तक मेले की खास पहचान रचनात्मक और कल्पनाशील बुक स्टॉल रहे। किताबें केवल अलमारियों में नहीं रहीं, बल्कि कला और विचार के साथ प्रस्तुत की गईं। चर्चित उपन्यास ‘दीवार में एक खिड़की’ से प्रेरित स्टॉल हो या लकड़ी के ढांचे से बना छोटा कमरा, हर स्टॉल पाठकों को ठहरने और सोचने पर मजबूर करता दिखा। एक पीले रंग के ट्रक को बुक स्टॉल में तब्दील कर देना बच्चों से लेकर युवाओं तक के लिए आकर्षण का केंद्र बना।

कोलकाता से आईं विचार और इतिहास की दुर्लभ किताबें

कोलकाता से आए सदी प्रकाशन का स्टॉल गंभीर और विचारशील पाठकों के लिए खास आकर्षण रहा। सदी प्रकाशन के संयोजक जितेंद्र जिताशु ने बताया कि गांधी दर्शन, पत्रकारिता का इतिहास, संत लालन फकीर और भारत-पाक संबंधों पर आधारित किताबों को पाठकों का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। यह संग्रह उन पाठकों को लुभाता दिखा, जो सतही पढ़ाई से आगे जाकर गहराई में उतरना चाहते हैं।

भीड़ से गदगद प्रकाशक और साहित्यकार

प्रगति मैदान में आयोजित मेले में पाठकों की लगातार बढ़ती संख्या ने प्रकाशकों और साहित्यकारों के चेहरे खिला दिए हैं। प्रभात प्रकाशन के निदेशक प्रभात कुमार के अनुसार, प्रवेश निःशुल्क किए जाने से युवाओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्रकाशकों का मानना है कि यह संकेत है कि युवा वर्ग आज भी किताबों से जुड़ना चाहता है।

डिजिटल युग में कविता और संवाद

विश्व पुस्तक मेला 2026 के दौरान ‘डिजिटल युग में कविता, पाठक और मंच’ विषय पर परिचर्चा भी आयोजित की गई। कवि एवं उद्यमी अर्पित मिश्रा ने अपनी काव्य कृति ‘भावांजलि’ के माध्यम से समकालीन कविता पर सार्थक संवाद प्रस्तुत किया। परिचर्चा में यह विचार प्रमुख रहा कि माध्यम चाहे डिजिटल हो जाए, कविता और पुस्तकें आज भी पाठकों की संवेदनाओं से गहराई से जुड़ी हैं।

अनुवाद, बहुभाषी साहित्य और रीडिंग इंडिया

साहित्य अकादमी के मंच पर निर्मल वर्मा रचना-संचयन का लोकार्पण हुआ और अनुवाद व बहुभाषी कहानी-पाठ पर विमर्श किया गया। वहीं, नेशनल बुक ट्रस्ट की ओर से ‘रीडिंग इंडिया संवाद’ का आयोजन भी किया गया, जिसका उद्देश्य पढ़ने की आदत और ज्ञान तक पहुंच को मजबूत करना है। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और विकसित भारत 2047 के लक्ष्यों से जुड़ी है।

कैलाश सत्यार्थी ने करुणा गुणांक पर दिया संदेश

मेले के दौरान नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी की उपस्थिति विशेष आकर्षण रही। उन्होंने ‘करुणा गुणांक’ की अवधारणा पर जोर देते हुए कहा कि जैसे आईक्यू बुद्धिमत्ता का पैमाना है, वैसे ही सीक्यू यह बताता है कि कोई व्यक्ति दूसरों के दुख-दर्द से कितना जुड़ता है। उनकी बातें खासकर बच्चों और युवाओं को गहराई से प्रभावित करती नजर आईं।

निष्कर्ष: पढ़ने की संस्कृति जिंदा है

विश्व पुस्तक मेला यह साबित कर रहा है कि डिजिटल युग के बावजूद किताबों का महत्व कम नहीं हुआ है। युवा वर्ग अंग्रेजी नॉवेल, कविता, इतिहास और विचारधारा के माध्यम से सीखने और खुद को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहा है। यही वजह है कि मेले की भीड़ से प्रकाशक और साहित्यकार दोनों उत्साहित हैं।

हमारे व्हाट्सएप्प चैनल को फॉलो करें

ये भी पढ़ें:

Author

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img
- Advertisement -spot_img

Latest

spot_img
spot_img

More articles

spot_img
spot_img
Webvarta Job Post Add