नई दिल्ली | राष्ट्रीय डेस्क | वेब वार्ता
Operation Sindoor को लेकर एक बार फिर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। ऑपरेशन के दौरान शहीद हुए छह भारतीय सैनिकों के नाम राष्ट्रीय समर स्मारक (नेशनल वॉर मेमोरियल) के ‘रोल ऑफ ऑनर’ में शामिल किए जाने के बाद कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पर संसद को गुमराह करने का आरोप लगाया है। विपक्ष का दावा है कि संसद में दिए गए बयान और अब सामने आई आधिकारिक जानकारी में विरोधाभास है। वहीं रक्षा मंत्रालय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि रक्षा मंत्री के भाषण को संदर्भ से हटाकर प्रस्तुत किया जा रहा है।
- ऑपरेशन सिंदूर में शहीद छह जवानों के नाम राष्ट्रीय समर स्मारक पर दर्ज किए गए।
- कांग्रेस ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पर संसद को गुमराह करने का आरोप लगाया।
- रक्षा मंत्रालय ने बयान को संदर्भ से काटकर पेश करने का आरोप लगाया।
- मंत्रालय ने कहा कि भाषण उस समय चल रहे दुष्प्रचार के संदर्भ में था।
- विपक्ष ने शहीदों की जानकारी सार्वजनिक करने में देरी पर भी सवाल उठाए।
- मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार जारी है।
Operation Sindoor विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
राष्ट्रीय समर स्मारक पर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले छह सैनिकों के नाम दर्ज किए जाने के बाद विपक्ष ने जुलाई 2025 में संसद में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के दिए गए बयान का हवाला देते हुए सरकार पर सवाल उठाए। कांग्रेस का कहना है कि यदि अभियान के दौरान सैनिक शहीद हुए थे तो संसद में अलग तस्वीर क्यों पेश की गई।
वहीं सरकार का कहना है कि विपक्ष भाषण के एक हिस्से को अलग करके प्रस्तुत कर रहा है, जबकि पूरे वक्तव्य का संदर्भ अलग था।
रक्षा मंत्रालय ने क्या कहा?
रक्षा मंत्रालय ने अपने आधिकारिक स्पष्टीकरण में कहा कि सोशल मीडिया पर रक्षा मंत्री के भाषण के एक छोटे हिस्से को संदर्भ से हटाकर प्रस्तुत किया जा रहा है। मंत्रालय के अनुसार, उस समय कुछ माध्यमों में भारतीय वायुसेना के पायलटों के मारे जाने संबंधी दावे किए जा रहे थे, जिन्हें सरकार ने भ्रामक बताया था।
मंत्रालय ने कहा कि रक्षा मंत्री का पूरा भाषण भारतीय सशस्त्र बलों के साहस, अभियान की सफलता और देश की सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर केंद्रित था। साथ ही सरकार ने कहा कि शहीद सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान का पूरा सम्मान किया गया है और उनके नाम राष्ट्रीय समर स्मारक पर अंकित किए गए हैं।
ऑपरेशन सिंदूर में शहीद सैनिक
| नाम | इकाई | मृत्यु तिथि |
|---|---|---|
| सूबेदार मेजर पवन कुमार (सेना मेडल) | 10 इन्फैंट्री ब्रिगेड | 10 मई 2025 |
| राइफलमैन सुनील कुमार (वीर चक्र) | 4 जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फैंट्री | 10 मई 2025 |
| लांस नायक दिनेश कुमार (सेना मेडल) | 5 फील्ड रेजिमेंट | 7 मई 2025 |
| एवी मूड मुरलीनाइक (सेना मेडल) | 851 लाइट रेजिमेंट | 9 मई 2025 |
| हवलदार सुनील कुमार सिंह (सेना मेडल) | 237 फील्ड वर्कशॉप कंपनी | 6 जून 2025 |
| सार्जेंट सुरेंद्र कुमार (वायु सेना मेडल) | 39 विंग (भारतीय वायुसेना) | 10 मई 2025 |
विपक्ष ने क्या लगाए आरोप?
कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल सहित विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि यदि ऑपरेशन के दौरान सैनिक शहीद हुए थे तो उनकी जानकारी संसद और देश के सामने समय पर क्यों नहीं रखी गई। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि या तो सरकार को सही जानकारी नहीं थी या फिर संसद को गुमराह किया गया।
आम आदमी पार्टी और अन्य विपक्षी नेताओं ने भी शहीदों की जानकारी सार्वजनिक करने में कथित देरी और संसद में दिए गए बयान को लेकर सवाल उठाए हैं।
राजनीतिक बहस जारी
ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े इस विवाद ने संसद में दिए गए बयानों की व्याख्या और सैन्य अभियानों से जुड़ी सूचनाओं के सार्वजनिक प्रकटीकरण को लेकर नई बहस छेड़ दी है। फिलहाल सरकार और विपक्ष दोनों अपने-अपने पक्ष पर अडिग हैं।
मामले में राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला जारी है, जबकि रक्षा मंत्रालय ने दोहराया है कि शहीद सैनिकों के सम्मान और उनके परिवारों के प्रति सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।




