नई दिल्ली | राष्ट्रीय डेस्क | वेब वार्ता
Muharram 2026 के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) के बलिदान को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि उनका त्याग आज भी पूरी दुनिया को सत्य, न्याय, साहस और दृढ़ विश्वास के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने संदेश में कहा कि कर्बला में हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) का सर्वोच्च बलिदान मानवता के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा और कठिन परिस्थितियों में भी सत्य के पक्ष में अडिग रहने का संदेश देता है।
⚡ संक्षिप्त वार्ता (Quick Info)
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुहर्रम पर हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) को श्रद्धांजलि दी।
- उन्होंने सत्य, न्याय, साहस और दृढ़ विश्वास के संदेश को याद किया।
- मुहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना है।
- आशूरा के दिन कर्बला में इमाम हुसैन (अ.स.) की शहादत की याद मनाई जाती है।
- दुनियाभर में मजलिस, मातम, दुआ और धार्मिक आयोजन किए जाते हैं।
- मुहर्रम इस्लामी (हिजरी) नववर्ष की शुरुआत का भी प्रतीक है।
Muharram 2026 पर प्रधानमंत्री का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में कहा कि हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) का बलिदान लोगों को सत्य और न्याय के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि यह बलिदान साहस, नैतिक मूल्यों और दृढ़ संकल्प की अमर मिसाल है, जो आज भी पूरी मानवता के लिए प्रेरणादायक है।
The sacrifice of Hazrat Imam Hussain (AS) continues to inspire many people to remain steadfast in the pursuit of truth and justice. It is also a reminder of the enduring power of courage and conviction.
— Narendra Modi (@narendramodi) June 26, 2026
मुहर्रम का धार्मिक महत्व क्या है?मुहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना और चार पवित्र महीनों में से एक माना जाता है। आशूरा के अवसर पर कर्बला की ऐतिहासिक घटना और हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) की शहादत को याद किया जाता है। इस दौरान दुनिया भर में दुआ, इबादत, चिंतन और शोक सभाओं का आयोजन होता है।
मुहर्रम से जुड़ी प्रमुख बातें
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| अवसर | मुहर्रम 2026 |
| प्रधानमंत्री का संदेश | सत्य, न्याय, साहस और दृढ़ विश्वास की प्रेरणा |
| ऐतिहासिक महत्व | कर्बला में हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) की शहादत |
| धार्मिक महत्व | इस्लामी (हिजरी) नववर्ष का पहला महीना |
| मुख्य आयोजन | मजलिस, मातम, दुआ और धार्मिक सभाएं |
कर्बला की घटना का संदेश
मुहर्रम का सबसे महत्वपूर्ण दिन आशूरा माना जाता है, जब कर्बला की ऐतिहासिक घटना को याद किया जाता है। हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) ने अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करते हुए अपने प्राण न्योछावर किए। उनका बलिदान न्याय, मानवता और नैतिक मूल्यों की रक्षा का प्रतीक माना जाता है।
प्रधानमंत्री के संदेश का क्या महत्व है?प्रधानमंत्री का संदेश धार्मिक सहिष्णुता, मानवता और सार्वभौमिक मूल्यों को सम्मान देने की भावना को दर्शाता है। उन्होंने हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) के बलिदान को पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा बताते हुए सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
दुनियाभर में मनाया जाता है मुहर्रम
भारत सहित दुनिया के अनेक देशों में मुहर्रम के दौरान धार्मिक सभाएं, मजलिस, मातमी जुलूस और विशेष प्रार्थनाएं आयोजित की जाती हैं। यह महीना आत्मचिंतन, इबादत और नैतिक मूल्यों को याद करने का अवसर भी माना जाता है।




