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कोयला खदान का पानी अब बनेगा पेयजल, Coal Neer Project से ₹5 में मिलेगी 20 लीटर की बोतल

रायपुर | राष्ट्रीय डेस्क | वेब वार्ता

Coal Neer Project के तहत अब कोयला खदानों से निकलने वाले माइन वाटर का उपयोग पेयजल के रूप में किया जाएगा। कोल इंडिया लिमिटेड ने इस महत्वाकांक्षी पहल की शुरुआत करते हुए खदानों के पानी को अत्याधुनिक आरओ और जल शोधन तकनीक से शुद्ध कर ‘कोल नीर’ ब्रांड के नाम से बाजार में उपलब्ध कराने की योजना बनाई है। इस योजना का उद्देश्य खदानों से निकलने वाले पानी का बेहतर उपयोग करना, स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना और जल संरक्षण को बढ़ावा देना है। योजना के तहत 20 लीटर की बोतल मात्र 5 रुपये में उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

⚡ संक्षिप्त वार्ता (Quick Info)

  • कोयला खदानों के माइन वाटर को पेयजल में बदला जाएगा।
  • परियोजना का नाम Coal Neer Project रखा गया है।
  • 20 लीटर पेयजल की बोतल 5 रुपये में उपलब्ध कराने का लक्ष्य।
  • आरओ और आधुनिक जल शोधन तकनीक से पानी होगा शुद्ध।
  • बीसीसीएल, सीसीएल, एसईसीएल और एमसीएल में बॉटलिंग प्लांट स्थापित।
  • जल संरक्षण और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण पहल।

Coal Neer Project के तहत खदानों के पानी का होगा नया उपयोग

देश में पहली बार बड़े स्तर पर कोयला खदानों से निकलने वाले माइन वाटर का उपयोग पेयजल के रूप में करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। लंबे समय से खदानों से निकलने वाला बड़ी मात्रा में पानी सीमित उपयोग के बाद बहा दिया जाता था। अब इस पानी को वैज्ञानिक प्रक्रिया के माध्यम से शुद्ध कर आम लोगों तक सुरक्षित पेयजल के रूप में पहुंचाने की तैयारी की गई है।

अधिकारियों के अनुसार, भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) की 46 खदानों में लगभग 1,280 लाख घनमीटर माइन वाटर उपलब्ध है। इस जल का प्रभावी उपयोग कर न केवल पेयजल की उपलब्धता बढ़ाई जाएगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण और जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में भी मदद मिलेगी।

कोयला खदानों का पानी पेयजल कैसे बनेगा?माइन वाटर को पहले अत्याधुनिक आरओ, फिल्ट्रेशन और अन्य जल शोधन प्रक्रियाओं से पूरी तरह शुद्ध किया जाएगा। गुणवत्ता परीक्षण के बाद इसे ‘कोल नीर’ ब्रांड के तहत बोतलबंद कर उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाएगा।

चार प्रमुख कंपनियों में लगाए गए बॉटलिंग प्लांट

कोल इंडिया लिमिटेड ने इस परियोजना के लिए अपनी चार प्रमुख सहायक कंपनियों बीसीसीएल (BCCL), सीसीएल (CCL), एसईसीएल (SECL) और एमसीएल (MCL) में माइन वाटर बॉटलिंग प्लांट स्थापित किए हैं। इन संयंत्रों में आधुनिक तकनीक की मदद से पानी को शुद्ध कर विभिन्न क्षमता की बोतलों में पैक किया जाएगा।

प्रमुख जानकारीविवरण
परियोजनाCoal Neer Project
संचालनकोल इंडिया लिमिटेड
जल स्रोतकोयला खदानों का माइन वाटर
शोधन तकनीकआरओ एवं आधुनिक जल शोधन प्रणाली
लक्षित मूल्य20 लीटर बोतल – 5 रुपये
स्थापित संयंत्रBCCL, CCL, SECL और MCL

जल संरक्षण और सामाजिक उपयोगिता को मिलेगा बढ़ावा

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल केवल पेयजल उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि जल संरक्षण, औद्योगिक संसाधनों के पुनः उपयोग और सतत विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। इससे उन क्षेत्रों में भी लाभ मिलेगा जहां स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता चुनौती बनी रहती है।

कोल इंडिया का लक्ष्य है कि भविष्य में इस मॉडल का विस्तार अन्य खदान क्षेत्रों में भी किया जाए ताकि खदानों से निकलने वाले पानी का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

Coal Neer Project का आम लोगों पर क्या असर होगा?यदि योजना निर्धारित लक्ष्य के अनुसार आगे बढ़ती है तो कम लागत में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध होगा। साथ ही खदानों से निकलने वाले पानी का वैज्ञानिक उपयोग बढ़ेगा, जल संरक्षण को प्रोत्साहन मिलेगा और पर्यावरणीय प्रभाव भी कम किया जा सकेगा।

आगे की दिशा

कोल इंडिया की यह पहल संसाधनों के बेहतर उपयोग और सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि परियोजना सफल रहती है तो अन्य खनन क्षेत्रों में भी इसी मॉडल को अपनाने की संभावना बढ़ेगी।

स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता, जल संरक्षण और औद्योगिक नवाचार को साथ लेकर चलने वाली यह योजना भविष्य में देश के खनन क्षेत्रों के लिए एक नई मिसाल बन सकती है।

 

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