नई दिल्ली, 09 मई (वेब वार्ता)। देश की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है। वर्तमान समय में देश के अधिकांश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भाजपा अथवा उसके सहयोगी दलों की सरकारें हैं। इसी क्रम में पश्चिम बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद शुभेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री पद के लिए चुना गया है। खास बात यह है कि शुभेंदु अधिकारी समेत कई ऐसे नेता हैं, जिन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत किसी दूसरी पार्टी से की, लेकिन बाद में भाजपा में शामिल होकर मुख्यमंत्री पद तक पहुंचे।
पश्चिम बंगाल में पहली बार भाजपा सरकार बनने जा रही है और विधायक दल की बैठक में शुभेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री पद के लिए चुना गया है। शुभेंदु अधिकारी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस पार्टी से की थी। वर्ष 2000 में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा और लंबे समय तक पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे। बाद में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण की और अब राज्य की सत्ता संभालने जा रहे हैं।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का नाम भी ऐसे नेताओं में प्रमुखता से लिया जाता है। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस से की थी और लंबे समय तक पार्टी में प्रभावशाली नेता रहे। वर्ष 2015 में भाजपा में शामिल होने के बाद उनका राजनीतिक कद तेजी से बढ़ा और वर्ष 2021 में वे असम के मुख्यमंत्री बने।
बिहार की राजनीति में सक्रिय सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर भी कई दलों से होकर गुजरा है। उन्होंने समता पार्टी से राजनीति शुरू की, फिर राष्ट्रीय जनता दल और जनता दल (यूनाइटेड) में रहे। बाद में भाजपा में शामिल होने के बाद वे उपमुख्यमंत्री बने और अब बिहार के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
पूर्वोत्तर भारत के कई मुख्यमंत्री भी पहले अन्य दलों से जुड़े रहे हैं। असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने असोम गण परिषद से राजनीति की शुरुआत की थी। बाद में भाजपा में शामिल होने के बाद वे राज्य के मुख्यमंत्री बने और वर्तमान में केंद्र सरकार में मंत्री हैं।
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू पहले कांग्रेस पार्टी में थे। वर्ष 2016 में भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने राज्य की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाई। इसी प्रकार मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह भी कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए थे और बाद में राज्य के मुख्यमंत्री बने।
मणिपुर के वर्तमान मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने भी भाजपा में आने से पहले दूसरे दलों में राजनीतिक भूमिका निभाई थी। भाजपा में शामिल होने के बाद उन्हें राज्य की सत्ता संभालने का अवसर मिला।
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री मानिक साहा पहले कांग्रेस से जुड़े रहे थे। वर्ष 2016 में भाजपा का दामन थामने के बाद उनका राजनीतिक प्रभाव बढ़ा और बाद में उन्हें राज्य का मुख्यमंत्री बनाया गया।
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा भी उन नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने भाजपा में शामिल होने के बाद नई पहचान हासिल की। झारखंड मुक्ति मोर्चा से राजनीति शुरू करने वाले अर्जुन मुंडा बाद में भाजपा में आए और कई बार मुख्यमंत्री बनने के साथ-साथ केंद्र सरकार में मंत्री भी रहे।
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने भी जनता दल से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। बाद में भाजपा में शामिल होने के बाद वे राज्य के मुख्यमंत्री बने और दक्षिण भारत में भाजपा के प्रमुख चेहरों में शामिल हुए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने विभिन्न दलों से आए नेताओं को संगठन और सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देकर अपने राजनीतिक विस्तार को मजबूत किया है। यही कारण है कि अलग-अलग विचारधाराओं से आने वाले कई नेता आज भाजपा के प्रमुख चेहरों के रूप में स्थापित हो चुके हैं।




