नई दिल्ली | राष्ट्रीय डेस्क | वेब वार्ता
Ayodhya Ram Temple Donation Case में बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत पर दर्ज प्राथमिकी के आधार पर सभी आठ नामजद आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। मामला अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में कथित दान और चढ़ावा से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं का है। पुलिस के अनुसार सभी आरोपियों को विधिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद न्यायिक रिमांड के लिए फैज़ाबाद के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया जाएगा। इस मामले की जांच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर आगे बढ़ाई गई है।
- राम मंदिर चढ़ावा मामले में आठ आरोपित गिरफ्तार।
- श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत पर एफआईआर दर्ज।
- एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद पुलिस ने कार्रवाई की।
- बीएनएस की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।
- आरोपियों को अदालत में पेश कर न्यायिक रिमांड मांगी जाएगी।
- मामले की निष्पक्ष जांच की मांग लगातार उठ रही है।
Ayodhya Ram Temple Donation Case में किन लोगों को किया गया गिरफ्तार?
पुलिस के अनुसार श्रीराम जन्मभूमि थाने में ट्रस्ट सदस्य कृष्ण मोहन की तहरीर पर दर्ज एफआईआर में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्र, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, लवकुश मिश्र, रमाशंकर मिश्र, सुभाष श्रीवास्तव तथा मनीष कुमार यादव सहित कुछ अज्ञात व्यक्तियों को नामजद किया गया था। पुलिस ने सभी आठ नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
प्राथमिकी में चोरी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक षड्यंत्र सहित भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि आगे की कार्रवाई न्यायालय के निर्देशों के अनुसार की जाएगी।
मामले से जुड़े प्रमुख घटनाक्रम
| घटनाक्रम | विवरण |
|---|---|
| 13 जून | मुख्यमंत्री के निर्देश पर एसआईटी का गठन |
| 23 जून | एसआईटी ने प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंपी |
| एफआईआर | आठ नामजद और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज |
| वर्तमान कार्रवाई | सभी आठ आरोपित गिरफ्तार |
| अगला चरण | अदालत में पेशी और न्यायिक रिमांड |
मुख्यमंत्री और संतों की क्या प्रतिक्रिया रही?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले ही स्पष्ट किया था कि एसआईटी की निष्पक्ष जांच से पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी और दोषियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने जांच को पूरी पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ाने के निर्देश दिए थे।
वहीं, कई संतों ने एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग करते हुए कहा है कि इससे पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आएगी और भविष्य में श्रद्धालुओं के दान के साथ किसी भी प्रकार की अनियमितता की आशंका कम होगी।
इकबाल अंसारी ने भी दी प्रतिक्रिया
बाबरी मस्जिद मामले के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया था और उसी दिशा में कार्रवाई होती दिखाई दे रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी होगी और तथ्य सामने आने के बाद कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल पूरे मामले पर प्रशासन, एसआईटी और न्यायालय की आगामी कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।




