बंगाल चुनाव 2026: 57 करीबी सीटों पर टिकी सत्ता की बाजी

कोलकाता, 20 अप्रैल (वेब वार्ता)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में इस बार सियासी मुकाबला केवल बड़े चेहरों और चुनावी रैलियों तक सीमित नहीं रह गया है। असली लड़ाई उन सीटों पर सिमटती नजर आ रही है, जहां पिछली बार जीत-हार का अंतर बेहद कम रहा था। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यही सीटें इस बार सत्ता की दिशा तय कर सकती हैं।

2021 के विधानसभा चुनाव के आंकड़े इस चुनावी रणनीति की नींव बन चुके हैं। राज्य की 294 सीटों में बहुमत के लिए 148 सीटों की जरूरत होती है, लेकिन करीब 57 सीटें ऐसी थीं, जहां जीत का अंतर 8000 वोट से भी कम रहा। इनमें कई सीटों पर परिणाम कुछ सौ वोटों के अंतर से तय हुए थे, जिससे इनका महत्व और बढ़ जाता है।

पिछले चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने 213 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत हासिल किया था, जबकि भारतीय जनता पार्टी 77 सीटों पर सिमट गई थी। अन्य दलों को 4 सीटें मिली थीं। हालांकि, आंकड़ों की गहराई में जाएं तो तस्वीर पूरी तरह एकतरफा नहीं दिखती, क्योंकि कई सीटों पर कांटे की टक्कर देखने को मिली थी।

इन 57 करीबी सीटों में से लगभग 30 पर तृणमूल कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी, जबकि भाजपा को करीब 25 सीटें मिली थीं और 2 सीटें अन्य दलों के खाते में गई थीं। इस आंकड़े से साफ है कि दोनों प्रमुख दलों के बीच संतुलन बना हुआ था, जो इस बार चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है।

भाजपा ने इस बार अपनी रणनीति का केंद्र इन्हीं करीबी सीटों को बनाया है। पार्टी उत्तर बंगाल और जंगलमहल जैसे क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने, बूथ स्तर पर पकड़ बढ़ाने और स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाने पर जोर दे रही है। भाजपा को उम्मीद है कि यदि इन सीटों पर बढ़त मिलती है, तो वह बहुमत के करीब पहुंच सकती है।

वहीं ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस ने भी बड़ा दांव खेलते हुए 74 मौजूदा विधायकों के टिकट काट दिए हैं। यह कदम खासकर उन सीटों पर ध्यान केंद्रित करते हुए उठाया गया है, जहां जीत का अंतर कम था या जन असंतोष की संभावना थी। पार्टी नए चेहरों को मौका देकर स्थानीय समीकरण साधने और योजनाओं के लाभार्थियों को जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है।

क्षेत्रीय स्तर पर भी मुकाबला दिलचस्प बना हुआ है। उत्तर बंगाल के कूचबिहार, जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार में भाजपा मजबूत मानी जा रही है, लेकिन यहां भी कई सीटें करीबी हैं। दक्षिण बंगाल के हावड़ा, हुगली, नदिया और उत्तर 24 परगना में तृणमूल कांग्रेस का प्रभाव है, फिर भी मुकाबला कड़ा रहने की संभावना है। जंगलमहल क्षेत्र में भी छोटे अंतर वाले मुकाबले चुनाव को रोचक बना सकते हैं।

एक ओर जहां कुछ सीटों पर भारी अंतर से जीत दर्ज हुई थी, वहीं दूसरी ओर कई सीटों पर बेहद मामूली अंतर ने परिणाम तय किए। यही कारण है कि विशेषज्ञ मानते हैं कि इस बार चुनाव का परिणाम बड़े अंतर वाली सीटों से नहीं, बल्कि उन्हीं क्षेत्रों से तय होगा जहां थोड़े से वोटों का झुकाव पूरी तस्वीर बदल सकता है।

अब नजर इस बात पर टिकी है कि क्या भाजपा इन करीबी सीटों पर सेंध लगाकर सत्ता की ओर बढ़ेगी, या तृणमूल कांग्रेस अपने संगठनात्मक बदलावों के जरिए बढ़त बनाए रखेगी। साफ है कि बंगाल की सत्ता की असली कहानी इस बार उन्हीं बूथों पर लिखी जाएगी, जहां हर वोट की कीमत पहले से कहीं ज्यादा है।

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