कोलकाता, 10 जुलाई (वेब वार्ता)। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उनकी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि यदि उन्हें चुप कराना है तो उनकी जान लेनी होगी, क्योंकि वह किसी भी दबाव के आगे झुकने वाली नहीं हैं।
ममता बनर्जी का यह बयान एक वीडियो संदेश के माध्यम से सामने आया, जिसे तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने सामाजिक माध्यम पर साझा किया। वीडियो में ममता बनर्जी ने कहा कि भाजपा उनकी आवाज दबाने और तृणमूल कांग्रेस को कमजोर करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है, लेकिन उनकी पार्टी इन प्रयासों से डरने वाली नहीं है।
वीडियो संदेश में उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं को विभिन्न मामलों में परेशान किया गया है। उन्होंने महुआ मोइत्रा, अभिषेक बनर्जी और श्री कल्याण बनर्जी का उल्लेख करते हुए कहा कि इन नेताओं को भी निशाना बनाया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके आवास तक पर हमला किया गया और पार्टी से जुड़े कई नेताओं के साथ हिरासत में अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है।
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि हिरासत में कुछ नेताओं को जमीन पर सोने के लिए मजबूर किया गया, जबकि कुछ के साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित एजेंसियों की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर भी ममता बनर्जी ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि राजनीति में विश्वास सबसे महत्वपूर्ण होता है और जो लोग तृणमूल कांग्रेस में रहकर किसी अन्य दल के लिए काम कर रहे हैं, उन्हें स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि यदि कोई भारतीय जनता पार्टी में जाना चाहता है तो खुलकर वहां जाए, लेकिन तृणमूल कांग्रेस में रहकर पार्टी कार्यकर्ताओं को भ्रमित न करे।
ममता बनर्जी का यह बयान ऐसे समय आया है जब तृणमूल कांग्रेस के कुछ पूर्व सांसद भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो चुके हैं। भारतीय जनता पार्टी ने हाल ही में पश्चिम बंगाल में होने वाले उपचुनावों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा भी की है, जिससे राज्य का राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है।
पश्चिम बंगाल की तीन रिक्त सीटों पर 24 जुलाई को उपचुनाव प्रस्तावित हैं। मतदान और मतगणना एक ही दिन होगी। इन चुनावों को राज्य की राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद दोनों प्रमुख दल अपनी-अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटे हैं।




