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आईएमपीसीएल के निजीकरण पर यूनानी तिब्बी कांग्रेस ने उठाए सवाल

नई दिल्ली, 20 जून (वेब वार्ता)। ऑल इंडिया यूनानी तिब्बी कांग्रेस ने इंडियन मेडिसिन्स फार्मास्युटिकल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईएमपीसीएल) के निजीकरण को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। संगठन के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. डी.आर. सिंह ने केंद्र सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग करते हुए कहा कि देश की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को सशक्त बनाने वाले एक महत्वपूर्ण और लाभकारी संस्थान को बेचने के बजाय उसका विस्तार और आधुनिकीकरण किया जाना चाहिए।

डॉ. डी.आर. सिंह ने कहा कि वर्ष 1978 में स्थापित आईएमपीसीएल आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा पद्धति की औषधियों के निर्माण के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित और विश्वसनीय संस्थान रहा है। यह संस्था गुणवत्तापूर्ण संयुक्त औषधियों के निर्माण के साथ-साथ अनुसंधान कार्यों के लिए आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है। ऐसे संस्थान का निजीकरण न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि पारंपरिक चिकित्सा व्यवस्था के विकास की दिशा में भी एक प्रतिकूल कदम माना जा सकता है।

उन्होंने कहा कि ऑल इंडिया यूनानी तिब्बी कांग्रेस लंबे समय से आईएमपीसीएल को अधिक सक्रिय और सक्षम बनाने की मांग करती रही है। संगठन ने समय-समय पर आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों तथा कर्मचारियों की नियुक्ति कर संस्थान की कार्यक्षमता बढ़ाने का सुझाव भी दिया था। इसके बावजूद संस्थान को मजबूत करने के बजाय निजीकरण का निर्णय लिया गया, जो चिंताजनक है।

डॉ. डी.आर. सिंह ने प्रश्न उठाया कि जब आईएमपीसीएल एक लाभकारी संस्था के रूप में कार्य कर रही थी, तब उसके निजीकरण की आवश्यकता क्यों महसूस की गई। उनका कहना है कि भारत सरकार ने आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध तथा अन्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने और उन्हें वैश्विक पहचान दिलाने के उद्देश्य से आयुष मंत्रालय की स्थापना की है। ऐसे में मंत्रालय के अधीन कार्यरत महत्वपूर्ण संस्थानों को कमजोर करना या उन्हें निजी हाथों में सौंपना नीति के मूल उद्देश्यों के विपरीत प्रतीत होता है।

उन्होंने कहा कि देश में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है और विश्व स्तर पर भी भारतीय चिकित्सा प्रणाली के प्रति रुचि में वृद्धि हुई है। ऐसे समय में आईएमपीसीएल जैसे संस्थानों को अनुसंधान, उत्पादन और गुणवत्ता सुधार के क्षेत्र में अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराए जाने चाहिए, ताकि वे और अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर सकें।

डॉ. सिंह ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह इस निर्णय की समीक्षा करे और आईएमपीसीएल को सशक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आयुष क्षेत्र के विकास और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के व्यापक विस्तार के लिए आईएमपीसीएल जैसे संस्थानों को प्रोत्साहन और संरक्षण प्रदान करना आवश्यक है। उनका कहना है कि इससे न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र को लाभ मिलेगा, बल्कि देश की समृद्ध चिकित्सा विरासत को भी नई मजबूती मिलेगी।

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