नई दिल्ली, 19 मई (वेब वार्ता)। ऊर्जा, पर्यावरण और स्वास्थ्य क्षेत्र की चुनौतियों के समाधान को लेकर बेस्ट क्योर फाउंडेशन और किटसॉल्ट एनर्जी ने व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। संस्था के अध्यक्ष एवं संस्थापक डॉ. कृष्णन सुथंथिरन के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में ऊर्जा अवसंरचना, आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं और प्राकृतिक जीवनशैली आधारित पहलों पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम में बताया गया कि वर्ष 2013 से 2026 के दौरान भारतीय सरकार के समक्ष ऊर्जा और पर्यावरण से जुड़े विभिन्न समाधान प्रस्तावित किए गए हैं। इस दौरान कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया क्षेत्र में स्थित किटसॉल्ट पोर्ट एवं टर्मिनल परियोजना को विशेष रूप से प्रस्तुत किया गया।
आयोजकों के अनुसार किटसॉल्ट एनर्जी अपनी समर्पित निर्यात बंदरगाह और ऑब्जर्वेटरी इनलेट स्थित टर्मिनल के माध्यम से कनाडाई ऊर्जा संसाधनों और अन्य वस्तुओं को एशियाई बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में कार्य कर रहा है। यह टर्मिनल किटसॉल्ट क्षेत्र से लगभग 25 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है और इसे ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य सेवाओं और प्राकृतिक जीवनशैली के महत्व पर भी विशेष बल दिया गया। ग्लोबल बेस्ट क्योर फाउंडेशन इंडिया द्वारा संचालित “बेस्ट क्योर प्रो हेल्थ एंड मेडिकल सेंटर्स” की गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया गया कि इन केंद्रों में कैंसर, हृदय रोग और मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों के निदान और उपचार पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
इसके साथ ही “बेस्ट लाइफस्टाइल्स” पहल के माध्यम से प्राकृतिक जीवनशैली अपनाने और बीमारियों की रोकथाम को बढ़ावा देने की बात कही गई। वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा और प्राकृतिक जीवनशैली के संतुलित समन्वय से बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित की जा सकती है।
डॉ. कृष्णन सुथंथिरन ने बताया कि किटसॉल्ट एनर्जी परियोजना पिछले 13 वर्षों से विकसित की जा रही एक बड़े स्तर की ऊर्जा अवसंरचना पहल है। इसका उद्देश्य भारत की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ दीर्घकालिक पर्यावरणीय और आर्थिक लक्ष्यों को समर्थन देना है।
परियोजना के अंतर्गत उत्तरी मैनिटोबा के पोर्ट चर्चिल को कनाडा के पश्चिमी तट पर स्थित किटसॉल्ट पोर्ट से जोड़ने की योजना है। इसके लिए दोहरी पाइपलाइन प्रणाली विकसित किए जाने का प्रस्ताव है, जिसके माध्यम से प्राकृतिक गैस, कच्चा तेल, प्रोपेन, ब्यूटेन, पोटाश, यूरेनियम तथा कृषि उत्पादों सहित विभिन्न संसाधनों के परिवहन की व्यवस्था की जाएगी।
आयोजकों का कहना है कि यह एकीकृत अवसंरचना मॉडल ऊर्जा आपूर्ति, आर्थिक विकास और पर्यावरणीय संतुलन के बीच समन्वय स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। कार्यक्रम में ऊर्जा सुरक्षा, सतत विकास और स्वास्थ्य सेवाओं को भविष्य की प्राथमिकताओं से जोड़ते हुए दीर्घकालिक रणनीतियों पर भी विचार-विमर्श किया गया।




