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रणनीतिक स्वायत्तता के मामले में अब भारत की राह पर चल रहा अमेरिका : जयशंकर

न्यूयॉर्क, 29 सितंबर (वेब वार्ता)। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क में आयोज‍ित एक कार्यक्रम में कहा कि भारत लंबे समय से अपनी रणनीतिक स्वायत्तता यानी अपने हितों के हिसाब से स्वतंत्र फैसले लेने की नीति के तहत जो करता रहा है, वही अब अमेर‍िका कर रहा है, कई देशों के साथ रिश्तों को एक साथ संभालने की कोशिश।

जयशंकर ने सोमवार को कार्यक्रम के दौरान कहा, “हमारे बारे में जो बातें पहले कही जाती थीं, आज वॉशिंगटन वही काम पूरे जोश के साथ कर रहा है।”

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उन्होंने अमेरिका के पूर्व सहायक विदेश मंत्री डैनियल रसेल से बातचीत के दौरान कहा, “आप चीन से बात कर रहे हैं, रूस से बात कर रहे हैं, यूक्रेन से बात कर रहे हैं और एशिया के दूसरे हिस्सों या यूरोप के साथ भी संबंध संभाल रहे हैं।”

जयशंकर ने कहा कि इस तरह देखा जाए तो वॉशिंगटन आज वही कर रहा है, जो भारत पहले से करता आया है।

भारत की रणनीतिक स्वायत्तता पर सवाल पूछते समय डैनियल रसेल ने अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली एक आम कहावत का जिक्र किया, ‘च्यूइंग गम चबाना और चलना।’ इसका मतलब है कि कोई व्यक्ति एक ही समय में अलग-अलग काम संभाल सकता है।

जयशंकर ने भी इसी उदाहरण को आगे बढ़ाते हुए मजाक में कहा, “मुझे लगता है कि वॉशिंगटन में उस च्यूइंगगम की काफी बड़ी सप्लाई है।”

उनका इशारा इस ओर था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका एक ही समय में कई देशों के साथ अलग-अलग तरह के रिश्ते और कई बार एक-दूसरे के खिलाफ जाने वाले हितों को भी संभालने की कोशिश कर रहा है।

जयशंकर ने कहा, “एक बार जब वॉशिंगटन इस मामले में आगे बढ़ता है, तो एक तरह से यह पूरी दुनिया का सवाल बन जाता है। यही आज की हकीकत है।”

जयशंकर ने कहा कि एक समय ऐसा था जब भारत जैसे देशों से कहा जाता था कि वे बहुत ज्यादा विकल्प न रखें और अपने रिश्तों को किसी एक देश पर ज्यादा केंद्रित करें। जयशंकर ने कहा कि दूसरी ओर अमेरिका खुद अपने लिए ज्यादा विकल्प बनाए रखता था, क्योंकि वह एक वैश्विक ताकत है। उन्होंने कहा क‍ि आज यह दिखावा सभी के लिए खत्म हो चुका है। अब हर कोई खुले तौर पर हर किसी के साथ रिश्ते रख रहा है।

जयशंकर ने कहा कि इसी तरह दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था यानी ऐसी दुनिया की ओर बढ़ रही है, जहां ताकत सिर्फ एक या दो देशों के हाथ में न होकर कई देशों के बीच बंटी होगी। च्यूइंगगम वाले उदाहरण को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा, ‘हर कोई इसे चबाने वाला है।’

जयशंकर ने कहा, “हर देश किसी भी स्थिति में अपने हितों को ज्यादा साफ तरीके से तय करते हुए अपने लिए सबसे बेहतर डील हासिल करने की कोशिश करेगा।”

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