वाशिंगटन, 1 जून (वेब वार्ता)। अमेरिका और ईरान के बीच जारी कूटनीतिक बातचीत के समानांतर सैन्य तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और उसके बाद ईरानी जवाबी दावों ने पश्चिम एशिया में हालात को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
अमेरिकी केंद्रीय कमान ने दावा किया है कि उसने सप्ताहांत में ईरान के गोरुक और केशम द्वीप स्थित रडार तथा ड्रोन नियंत्रण केंद्रों पर कार्रवाई की। अमेरिकी पक्ष के अनुसार यह कार्रवाई उस घटना के जवाब में की गई, जिसमें अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में उड़ान भर रहे अमेरिकी एमक्यू-1 ड्रोन को मार गिराया गया था।
सेंटकॉम के अनुसार अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरानी हवाई सुरक्षा तंत्र, एक नियंत्रण केंद्र और दो हमलावर ड्रोन को निशाना बनाया। अमेरिकी सैन्य कमान ने कहा कि इस कार्रवाई में उसके किसी सैन्यकर्मी को नुकसान नहीं पहुंचा।
दूसरी ओर ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने अमेरिकी हमलों के बाद जवाबी कार्रवाई का दावा किया है। ईरानी मीडिया रिपोर्टों में कहा गया कि गार्ड बलों ने क्षेत्र में एक अमेरिकी सैन्य अड्डे को निशाना बनाया। हालांकि ईरानी पक्ष ने सार्वजनिक रूप से उस अड्डे का स्पष्ट नाम नहीं बताया है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन गतिविधियों की भी जानकारी सामने आई है, जिससे तनाव और बढ़ गया है। कुछ देशों ने अपने हवाई सुरक्षा तंत्र सक्रिय करने की पुष्टि की है।
विश्लेषकों का मानना है कि सैन्य घटनाओं के बावजूद दोनों देशों के बीच बातचीत पूरी तरह बंद नहीं हुई है, लेकिन ताजा घटनाक्रम से वार्ता प्रक्रिया पर दबाव बढ़ सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया टकराव ने एक बार फिर क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं तेज कर दी हैं।




