मास्को, 06 जून (वेब वार्ता)। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सेंट पीटर्सबर्ग अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मंच में भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा और भारतीयों की प्रतिभा की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत और रूस के बीच वर्ष 1947 से ही भाईचारे और विश्वास पर आधारित संबंध रहे हैं, जो समय के साथ और मजबूत हुए हैं।
पुतिन ने कहा कि भारतीय लोग अत्यंत प्रतिभाशाली और अच्छी शिक्षा प्राप्त करने वाले होते हैं। उन्होंने विशेष रूप से भारतीयों की तकनीकी दक्षता की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने कोडिंग और अन्य क्षेत्रों में पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है।
भारत में 25 अरब डॉलर का निवेश
रूसी राष्ट्रपति ने बताया कि रूस की प्रमुख तेल कंपनी ने भारत की अर्थव्यवस्था में लगभग 25 अरब डॉलर का निवेश किया है। इस निवेश का उपयोग तेल रिफाइनरी, बंदरगाहों और ईंधन वितरण केंद्रों के विकास में किया गया है।
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया की परिस्थितियों के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे समय में रूस ऊर्जा आपूर्ति बढ़ाकर और तकनीकी सहयोग देकर भारत के विश्वसनीय मित्र की भूमिका निभा रहा है।
पुतिन ने विश्वास जताया कि दोनों देशों का यह सहयोग भविष्य में और अधिक मजबूत होगा तथा इसके सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।
भारत बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकता
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत ऐसा देश है जो किसी भी बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकता और अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए स्वतंत्र निर्णय लेता है।
उन्होंने चीन का उल्लेख करते हुए कहा कि वह भी अपनी संप्रभुता और निर्णय लेने की स्वतंत्रता को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है तथा अपनी ताकत के बल पर बाहरी नियंत्रण को स्वीकार नहीं करता।
रूस-चीन साझेदारी पर भी रखी बात
रूस और चीन के संबंधों को लेकर पुतिन ने कहा कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा और उच्च प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में संतुलित साझेदारी विकसित हुई है।
उन्होंने बताया कि रूस से चीन को भेजे जाने वाले उन्नत उपकरणों और मशीनों की मात्रा लगातार बढ़ रही है। रूस चीन में परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के निर्माण में भी सहयोग कर रहा है। कई इकाइयां पहले से संचालित हैं, जबकि अन्य परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं।
पुतिन के अनुसार, दोनों देश तकनीकी ज्ञान, आंकड़ों और विशेषज्ञता का आदान-प्रदान कर रहे हैं और यह सहयोग आगे भी जारी रहेगा।
अमेरिका को दी आर्थिक चेतावनी
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए पुतिन ने कहा कि तेल की बढ़ती कीमतें दुनिया भर में महंगाई को बढ़ावा दे सकती हैं। उनका मानना है कि यदि ऊर्जा की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो इसका प्रभाव प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं, विशेष रूप से अमेरिका पर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि किसी भी अर्थव्यवस्था की स्थिरता के लिए महंगाई पर नियंत्रण बेहद जरूरी है। यदि तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि होती है और महंगाई बढ़ती है तो इससे आर्थिक आधार कमजोर पड़ सकता है।
रूसी राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि वैश्विक आर्थिक संतुलन बनाए रखने के लिए ऊर्जा क्षेत्र में स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग अत्यंत आवश्यक है।
भारत को लेकर पुतिन के ताजा बयान को दोनों देशों के बीच मजबूत रणनीतिक साझेदारी और आपसी विश्वास का प्रतीक माना जा रहा है। ऐसे समय में जब वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों से गुजर रही है, रूस की ओर से भारत की खुली प्रशंसा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है।




