तेहरान, 20 जुलाई (वेब वार्ता)। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के साथ हुई बातचीत को लेकर महत्वपूर्ण खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि वार्ता के दौरान माहौल अत्यंत तनावपूर्ण था और किसी भी समय बमबारी की आशंका बनी हुई थी। इसके बावजूद ईरान ने अमेरिकी दबाव और धमकियों के सामने झुकने से स्पष्ट इनकार किया।
मेहर समाचार संस्था को दिए एक साक्षात्कार में अब्बास अराघची ने कहा कि बातचीत के दौरान उन्होंने स्टीव विटकॉफ से पूछा था कि क्या वह कभी ऐसी वार्ता का हिस्सा रहे हैं, जहां किसी भी क्षण बमबारी शुरू होने का खतरा मंडरा रहा हो। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनका संकेत किस स्थान अथवा किस दौर की बातचीत की ओर था।
विदेश मंत्री ने कहा कि ईरान किसी भी प्रकार की धमकी से भयभीत होने वाला देश नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरान की तुलना वेनेजुएला से नहीं की जा सकती, जहां दबाव बनाकर राजनीतिक परिस्थितियों को प्रभावित करने का प्रयास किया गया था। उनके अनुसार तेहरान किसी भी बाहरी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।
ईरान ने यह भी स्पष्ट किया कि स्टीव विटकॉफ के साथ हुए संपर्क को औपचारिक वार्ता का दर्जा नहीं दिया जा सकता। विदेश मंत्री के अनुसार दोनों पक्षों के बीच संवाद परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर विभिन्न चरणों में हुआ, लेकिन इसे नियमित राजनयिक वार्ता नहीं माना जाना चाहिए।
जानकारी के अनुसार अब्बास अराघची और स्टीव विटकॉफ के बीच संपर्क पिछले वर्ष परमाणु वार्ता शुरू होने के बाद कई चरणों में हुआ। पहला दौर छह फरवरी को ओमान की राजधानी मस्कट में अप्रत्यक्ष रूप से आयोजित किया गया था, जहां ओमान के मध्यस्थ दोनों प्रतिनिधिमंडलों के बीच संवाद स्थापित कर रहे थे। बाद में मस्कट और रोम में भी कई दौर की बातचीत हुई।
इसके बाद दोनों पक्षों की मुलाकात जिनेवा में भी हुई, लेकिन उसके कुछ समय बाद क्षेत्रीय संघर्ष शुरू हो गया, जिससे वार्ता की प्रक्रिया प्रभावित हुई। रिपोर्टों के अनुसार अप्रैल में अब्बास अराघची ने पाकिस्तान के अधिकारियों की मध्यस्थता से संबंधित बैठकों के सिलसिले में इस्लामाबाद, मस्कट और मॉस्को का भी दौरा किया। औपचारिक बैठकों के अतिरिक्त दोनों पक्षों के बीच संदेशों के माध्यम से भी संवाद का एक अलग माध्यम सक्रिय रहा।
ईरान के इस ताजा बयान को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है और परमाणु कार्यक्रम को लेकर ईरान तथा अमेरिका के बीच मतभेद अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं।




