वॉशिंगटन, 27 अप्रैल (वेब वार्ता)। डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी संघर्ष को लेकर बड़ा बयान देते हुए दावा किया है कि यह जंग जल्द समाप्त होगी और इसमें अमेरिका की जीत होगी। उनके इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं, जबकि युद्धविराम के बाद भी दोनों देशों के बीच वार्ता की कोशिशें ठप पड़ी हैं।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत फिलहाल सफल नहीं हो सकी है। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच संवाद के प्रयास जारी हैं और मध्यस्थता की भूमिका में पाकिस्तान सक्रिय बताया जा रहा है।
शांति प्रयासों के बीच कूटनीतिक हलचल तेज
इधर, अब्बास अराघची ने इस्लामाबाद में पाकिस्तान के नेताओं को युद्ध से जुड़े शांति प्रस्तावों की सूची सौंपी थी। इस दौरान यह भी स्पष्ट हुआ कि ईरान फिलहाल अमेरिका के साथ सीधे संवाद के पक्ष में नहीं है।
सूत्रों के अनुसार, ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद से रवाना होने के बाद अलग-अलग स्थानों पर गया, जिसमें कुछ अधिकारी ओमान पहुंचे, जबकि अन्य तेहरान लौट गए। अब यह प्रतिनिधिमंडल आगे रूस का दौरा कर सकता है, जिससे कूटनीतिक गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है।
बातचीत पर ट्रंप का खुला रुख
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि वह ईरान के साथ बातचीत का रास्ता खुला रखना चाहते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि ईरान के भीतर भी अलग-अलग मत हैं—कुछ लोग बातचीत के पक्ष में हैं, जबकि कुछ इसके विरोध में हैं।
ट्रंप ने उम्मीद जताई कि ईरान समझदारी भरा निर्णय लेगा। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने उचित कदम नहीं उठाए, तो इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं। उन्होंने दोहराया कि अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने की अपनी मांग पर कायम है।
वैश्विक शक्तियों पर भी टिप्पणी
इस दौरान ट्रंप ने नाटो की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि आवश्यकता के समय यह प्रभावी साबित नहीं हुआ। वहीं, चीन को लेकर उन्होंने कहा कि उसने अपेक्षाकृत नरम रुख अपनाया है और स्थिति को और बिगड़ने से रोका है।
अनिश्चितता के बीच बढ़ती चिंता
ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। युद्धविराम के बावजूद ठोस समाधान न निकल पाने से स्थिति अनिश्चित बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं हुए, तो क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।



