लेख

डिजिटल होमवर्क का दिखावा और बचपन पर बढ़ता बोझ

-डॉ. सत्यवान सौरभ-कोरोना महामारी ने शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया। लॉकडाउन के दौरान स्कूलों के बंद होने पर ऑनलाइन शिक्षा एक...

आँगनवाड़ी प्रणाली का बदलता स्वरूप और भारत का भविष्य

-डॉ. प्रियंका सौरभ-किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसके प्राकृतिक संसाधनों या भौतिक संपदा में नहीं, बल्कि उसकी मानव पूंजी में निहित होती...

महाराणा प्रताप जयंती : संघर्ष, त्याग और स्वतंत्रता की अमर गाथा

-कांतिलाल मांडोत-भारत के इतिहास में अनेक ऐसे महापुरुष हुए हैं जिन्होंने अपने साहस, त्याग और राष्ट्रप्रेम से आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा...

धर्मार्थ न्यासों की सामाजिक शक्ति

-डॉ. प्रियंका सौरभ-भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में विकास का वास्तविक अर्थ केवल आर्थिक वृद्धि नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग तक...
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अमेरिका ईरान शांति समझौता और बदलती वैश्विक राजनीति

-कांतिलाल मांडोत-कई महीनों से जारी तनाव और टकराव के बाद अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की खबर ने पूरी दुनिया...

एआई की बढ़ती प्यास और दुनिया का जल भविष्य

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस) को 21वीं सदी की सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति माना जा रहा है। स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, वित्त, रक्षा और प्रशासन जैसे...

अमेरिकी मनमानी और भारत की संप्रभुता: खेद जताने से नहीं, कदम उठाने से बचेगा राष्ट्रीय स्वाभिमान

-कपिल बर्मन-संप्रभुता की परीक्षा: क्या वैश्विक दबाव के आगे नतमस्तक हो रहा है आधुनिक भारत? भारत के संविधान की प्रस्तावना में 'संप्रभु' (Sovereign) शब्द...

भारत-बांग्लादेश संबंधों में बढ़ता अविश्वास 

-डॉ. सत्यवान सौरभ-भारत और बांग्लादेश के संबंध दक्षिण एशिया की कूटनीति में विशेष महत्व रखते हैं। वर्ष 1971 में बांग्लादेश की स्वतंत्रता के...
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साइबर अपराध का बढ़ता खतरा: 354 करोड़ की ठगी और कमजोर रिकवरी सिस्टम की चुनौती

-साइबर ठगी का बढ़ता साम्राज्य : जनता की गाढ़ी कमाई लूट रहे अपराधी, सुरक्षा तंत्र पर उठ रहे गंभीर सवाल-कांतिलाल मांडोत-डिजिटल इंडिया के...

तंत्र पर तंत्र हावी : हरदोई मे परियल का वह घटनाक्रम जिसने कई सवाल खड़े कर दिए

-लक्ष्मीकान्त पाठक हरदोई। लोकतंत्र में प्रशासन, राजनीति और कानून तीन ऐसे स्तंभ हैं, जिनके बीच संतुलन ही व्यवस्था की मजबूती का आधार माना जाता है।...

वैचारिक भटकाव और सांगठनिक बिखराव: दलित आंदोलनों की नियति?

-कपिल बर्मन- दलित आंदोलनों की सबसे बड़ी विडंबना यह रही है कि वे बहुत जल्द सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक सुधार के रास्ते को छोड़कर...

विश्व पर्यावरण दिवस 2026: सिर्फ एक दिन नहीं, प्रकृति संरक्षण का आजीवन संकल्प

-सुनील कुमार महला- नीला ग्रह यानी कि यह पृथ्वी हमारा इकलौता घर है और इसकी सुरक्षा तथा संरक्षण किसी एक व्यक्ति, देश या संस्था...
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रोहतक विवाद: विधायक-एसपी टकराव से उठे लोकतंत्र, कानून और मर्यादा पर सवाल

-डॉ. सत्यवान सौरभ-लोकतंत्र केवल चुनाव जीतने और सत्ता प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह आचरण, मर्यादा और संस्थाओं के प्रति सम्मान...

बांग्लादेशी घुसपैठियों पर सबसे बड़ा शिकंजा और राज्यव्यापी सर्च अभियान

-कांतिलाल मांडोत- -एसआईआर के बाद गुजरात की ओर बढ़ा रुख गुजरात में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ राज्य सरकार और पुलिस...

पत्रकार या ‘पत्थरकार’

-निर्मल रानी-  पेरिस-आधारित अंतरराष्ट्रीय संगठन रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स द्वारा वार्षिक रूप से जारी किये जाने वाले विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक के अनुसार यदि भारतीय पत्रकारिता...
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