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लगातार चौथे दिन टूटा शेयर बाजार, अमेरिका-ईरान तनाव और मानसून बने वजह

मुंबई, 02 जून (वेब वार्ता)। भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला लगातार चौथे कारोबारी सत्र में भी जारी रहा। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन बाजार ने सकारात्मक शुरुआत की थी, लेकिन ऊपरी स्तरों पर बढ़ी बिकवाली के चलते प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और कमजोर मानसून के अनुमान ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।

कारोबार समाप्त होने पर निफ्टी 50 में 0.70 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 23,382.60 अंक पर बंद हुआ। वहीं सेंसेक्स 508 अंक यानी 0.68 प्रतिशत टूटकर 74,267.35 अंक पर पहुंच गया। बैंकिंग शेयरों पर भी दबाव देखने को मिला और बैंक निफ्टी 1.10 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। बाजार में अस्थिरता का संकेत देने वाला सूचकांक 2.16 प्रतिशत बढ़कर 16.54 पर पहुंच गया।

अमेरिका-ईरान तनाव का असर

बाजार पर सबसे अधिक दबाव पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का रहा। रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव ने वैश्विक निवेशकों को सतर्क कर दिया है। इस घटनाक्रम के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा।

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयातित तेल पर निर्भर है। ऐसे में तेल की कीमतें बढ़ने से आयात बिल, महंगाई और रुपये पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। यही कारण रहा कि निवेशकों ने जोखिम लेने से परहेज किया।

कमजोर मानसून अनुमान से बढ़ी चिंता

भारतीय मौसम विभाग द्वारा मानसून के अनुमान में कमी किए जाने के बाद कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बारिश सामान्य से कम रहती है तो कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है और ग्रामीण क्षेत्रों में मांग कमजोर पड़ सकती है।

इसका असर उपभोक्ता वस्तु, ट्रैक्टर, दोपहिया वाहन, उर्वरक और कृषि रसायन क्षेत्र की कंपनियों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

ऑटो क्षेत्र में मिला-जुला प्रदर्शन

मई माह के वाहन बिक्री आंकड़ों ने भी बाजार को उत्साहित नहीं किया। कुछ प्रमुख वाहन कंपनियों ने बिक्री में वृद्धि दर्ज की, लेकिन कई कंपनियों के प्रदर्शन ने निवेशकों को निराश किया। कृषि क्षेत्र से जुड़ी मांग और बढ़ती लागत को लेकर जताई गई चिंताओं ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया।

जीएसटी संग्रह की रफ्तार हुई धीमी

मई महीने में वस्तु एवं सेवा कर संग्रह 1.94 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में वृद्धि दर्शाता है। हालांकि अप्रैल के रिकॉर्ड स्तर की तुलना में यह आंकड़ा कम रहा। इससे आर्थिक गतिविधियों और मांग की गति को लेकर कुछ सवाल खड़े हुए हैं।

कौन से क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित रहे?

दिनभर के कारोबार में उपभोक्ता वस्तु क्षेत्र सबसे अधिक दबाव में रहा। इस क्षेत्र से जुड़े सूचकांक में 2.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र ने मजबूती दिखाई और यह दिन का सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला क्षेत्र रहा।

आगे क्या रहेगा बाजार का रुख?

विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतें, मानसून की प्रगति और आगामी आर्थिक आंकड़े आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेंगे। फिलहाल निवेशक सतर्क नजर आ रहे हैं और अधिकांश क्षेत्रों में मुनाफावसूली का दबाव बना हुआ है।

सोमवार की गिरावट ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि घरेलू और वैश्विक दोनों स्तरों पर मौजूद अनिश्चितताओं का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है।

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