लक्ष्मीकान्त पाठक
हरदोई 18 सितम्बर (वेबवार्ता) गणपति महोत्सव की आस्था जब कविता के रंग में घुली तो कछौना की रात देर तक शब्दों की रोशनी से जगमगाती रही। सोमेश्वर महादेव सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित भव्य अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देश के विभिन्न अंचलों से पहुंचे कवियों ने प्रेम, श्रृंगार, हास्य-व्यंग्य, भक्ति और राष्ट्रभक्ति से सजी रचनाओं के जरिए श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा। कभी ठहाके गूंजे तो कभी तालियों की गड़गड़ाहट ने कवियों का उत्साह बढ़ाया।
कवि सम्मेलन का संचालन हरदोई के चर्चित कवि अजीत शुक्ल ने अपने चिरपरिचित अंदाज में किया। समसामयिक राजनीति और बदलते राजनीतिक परिवेश पर उनके तीखे कटाक्षों ने खूब वाहवाही बटोरी। चाटुकारिता पर तंज कसते हुए उन्होंने पढ़ा—
“चाटुकारिता के फंडे बदल रहे हैं,
आ रहा चुनाव तो झंडे बदल रहे हैं।”
पंक्तियां सुनते ही पंडाल तालियों से गूंज उठा।
प्रेम और संवेदनाओं के कवि राघवेन्द्र सिंह राघव ने रिश्तों और जीवन की हकीकत को अपनी रचना में पिरोया। उनकी पंक्तियां—
“प्रेम का रंग चढ़ाया नहीं आपने,
दिल से दिल भी मिलाया नहीं आपने।
चार पैसों में गुजरी चली जिंदगी,
और कुछ भी कमाया नहीं आपने।”
श्रोताओं के दिल को छू गईं।
कासगंज के मनोज मधुवन ने प्रेम की अनुभूति को शब्द देते हुए कहा—
“भाव से भाव का जब वरण हो गया,
कामना वासना का क्षरण हो गया,
दो हृदय जब मिले, हो गया एक मन,
बस वहीं प्रेम का अवतरण हो गया।”
हरदोई की कवयित्री पल्लवी मिश्रा ने राम-सिया के पावन संदर्भ को अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति का आधार बनाया। उनकी पंक्तियां—
“राम ही राम जपती तुम्हारी प्रिया,
हाय! कैसी परीक्षा सिया के पिया…”
सुनकर पंडाल में भक्ति और करुणा का वातावरण बन गया।
इसके बाद मंच पर आए हास्य-व्यंग्य के चर्चित कवि अनुभव अज्ञानी। उनकी प्रस्तुति शुरू होते ही श्रोताओं के बीच ठहाकों का दौर चल पड़ा। समकालीन विसंगतियों पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा—
“लगा के दिल में आग जाता है,
ऐन मौके में जाग जाता है,
इश्क हो गया है विजय माल्या,
पैसे मिलते ही भाग जाता है।”
बाराबंकी के विकास बौखल ने भी हास्य का रंग गाढ़ा करते हुए सुनाया—
“कुएं पे ध्यान दो ना ही खाई पे ध्यान दो,
अब ठंड आ रही है रजाई पे ध्यान दो।”
इस चुटीली रचना पर देर तक ठहाके गूंजते रहे।
अम्बेडकर नगर के ओजस्वी कवि अभय निर्भीक ने अपनी बुलंद आवाज से माहौल में राष्ट्रभक्ति का जोश भर दिया। भारत माता और तिरंगे के सम्मान को समर्पित उनकी पंक्तियां—
“भारत माता का हरगिज सम्मान नहीं खोने देंगे,
अपने पूज्य तिरंगे का अपमान नहीं होने देंगे।”
पर युवाओं ने जोरदार तालियों से समर्थन किया।
इटावा के कवि गौरव चौहान ने सामाजिक सरोकारों और व्यवस्था से जुड़े विषयों पर अपनी रचनाओं के जरिए श्रोताओं का ध्यान खींचा। अलग-अलग रसों और तेवरों से सजे कवि सम्मेलन ने गणेश महोत्सव की सांस्कृतिक संध्या को यादगार बना दिया।
समापन अवसर पर कछौना नगर पंचायत अध्यक्ष राधा रमण शुक्ल ने मंच पर पहुंचकर सभी कवियों, अतिथियों, आयोजन समिति के पदाधिकारियों और दूर-दराज से पहुंचे श्रोताओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने सफल आयोजन के लिए सोमेश्वर महादेव सेवा समिति के पदाधिकारियों और सहयोगियों की सराहना की।
कार्यक्रम में भाजपा जिलाध्यक्ष अजीत सिंह बब्बन, उपाध्यक्ष प्रीतेश दीक्षित, संदीप सिंह, माधौगंज नगर पंचायत अध्यक्ष अनुराग मिश्र, अधिशासी अधिकारी देवांशी दीक्षित, क्रांति वीर सिंह, विनय शुक्ल, रवि गुप्ता सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक, समाजसेवी, मातृशक्ति और युवा मौजूद रहे। देर रात तक श्रोता पंडाल में डटे रहे और तालियों से कवियों का उत्साहवर्धन करते रहे।




