भगवान श्रीराम के जन्मस्थान पर बयानबाजी करने से पहले इतिहास का अध्ययन करें डॉ. एस.टी. हसन : डॉ. पवन कुमार जैन
मुरादाबाद। डॉ. एस.टी. हसन के भगवान श्रीराम के संबंध में दिए गए बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बाबू मुकुट बिहारी लाल जैन सेवा न्यास के अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार जैन ने कहा कि डॉ. एस.टी. हसन समाचार पत्रों में सुर्खियां बटोरने के लिए आए दिन स्तरहीन बयानबाजी करते रहते हैं। भगवान श्रीराम के जन्मस्थान और उनके ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक महत्व पर टिप्पणी करने से पहले उन्हें भारतीय इतिहास, संस्कृति और धार्मिक परंपराओं का अध्ययन करना चाहिए। भगवान श्रीराम के विषय में अनर्गल बयान देने का उनका कोई नैतिक या बौद्धिक आधार नहीं है।
डॉ. जैन ने कहा कि यदि डॉ. हसन को भगवान श्रीराम की जन्मस्थली के विषय में जानकारी नहीं है, तो यह उनकी जानकारी का अभाव है, न कि इतिहास का। ज्ञान प्राप्त करने के लिए अध्ययन और तथ्यों की समझ आवश्यक होती है। केवल बयानबाजी करके समाज में भ्रम फैलाने से किसी व्यक्ति की योग्यता प्रदर्शित नहीं होती, बल्कि उसकी अज्ञानता और वैचारिक अपरिपक्वता उजागर होती है।
उन्होंने कहा कि सरयू नदी के पावन तट पर बसी अयोध्या नगरी भारत की प्राचीन ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है। यह प्राचीन कौशल राज्य की राजधानी तथा मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की जन्मस्थली के रूप में विश्वभर में विख्यात है। हिंदू धर्म की सप्तपुरियों में अयोध्या का विशिष्ट स्थान है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपरा और रामायण की अमर गाथा अयोध्या से गहराई से जुड़ी हुई है।
डॉ. पवन कुमार जैन ने कहा कि 9 नवंबर 2019 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अयोध्या भूमि विवाद पर सर्वसम्मति से ऐतिहासिक निर्णय सुनाया था। इस निर्णय के बाद अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ। यह निर्णय देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था द्वारा तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर दिया गया था। ऐसे में इस विषय पर अनर्गल बयानबाजी करना न्यायिक निर्णय और देश की सामाजिक भावनाओं के प्रति अनावश्यक विवाद उत्पन्न करने जैसा है।
उन्होंने आगे कहा कि अंग्रेजों ने भारत में अपनी सत्ता बनाए रखने के लिए ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति अपनाई थी। अंग्रेज तो देश छोड़कर चले गए, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज भी कुछ लोग उसी विभाजनकारी मानसिकता को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। डॉ. एस.टी. हसन के इस प्रकार के बयान समाज को जोड़ने के बजाय बांटने का काम करते हैं। सस्ती लोकप्रियता और समाचारों में बने रहने के लिए दिए गए ऐसे बयानों से न तो समाज का हित होने वाला है और न ही देश की एकता मजबूत होगी।




