श्रीविश्वनाथ मन्दिर, नई तहसील सोनकपुर, भोला सिंह मिलक में श्री सुंदरकाण्ड एवं हरिनाम संकीर्तन का आयोजन श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में कथाव्यास वैष्णवाचार्य धीरशान्त ‘अर्द्धमौनी’ ने श्रीरामचरितमानस की चौपाइयों के माध्यम से सुंदरकाण्ड की आध्यात्मिक महत्ता, हनुमान जी की भक्ति और प्रभु श्रीराम की कृपा का भावपूर्ण वर्णन किया।
प्रवचन के मध्य सुंदरकाण्ड की प्रसिद्ध चौपाई—
“उमा कहहुँ मैं अनुभव अपना।
सत हरि भजनु जगत सब सपना॥” का वर्णन करते हुए भक्ति, जीवन की नश्वरता और प्रभु के स्मरण के महत्व को समझाया गया।
हनुमान जी द्वारा विभीषण को समझाने वाली चौपाई—“कह हनुमंत बिपति प्रभु सोई।
जब तव सुमिरन भजन न होई॥”
के माध्यम से बताया गया कि जीवन की वास्तविक विपत्ति प्रभु के स्मरण और भजन से विमुख होना है। रामनाम मनुष्य को कठिन परिस्थितियों में धैर्य, साहस और सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करता है।
सुंदरकाण्ड में हनुमान जी की समुद्र लाँघकर लंका पहुँचने, अशोक वाटिका में माता सीता को प्रभु श्रीराम की मुद्रिका देने तथा प्रभु का संदेश पहुँचाने की घटनाओं का वर्णन करते हुए बताया कि हनुमान जी का जीवन निष्ठा, सेवा, विनम्रता और अदम्य साहस की प्रेरणा देता है। श्रीरामचरितमानस के आदर्शों को अपनाकर परिवार और समाज में प्रेम, सद्भाव तथा संस्कारों को मजबूत किया जा सकता है।
हरिनाम संकीर्तन से वातावरण भक्तिमय बना रहा। आयोजन में ओमप्रकाश शर्मा, रमेश चंद्र शर्मा, सुनीता शर्मा, पुष्पा शर्मा, राघव शर्मा, प्रेरणा शर्मा, नन्दिनी शर्मा, आँचल शर्मा, लक्ष्मी भारद्वाज, अरविन्द भारद्वाज, अमित भारद्वाज, विवेक भारद्वाज, दीक्षा भारद्वाज, श्रद्धा भारद्वाज, पायल भारद्वाज, गुड़िया मिश्रा, सतीश मिश्रा, राधिका मिश्रा, आदित्य मिश्रा, तनु शर्मा, आकाश शर्मा एवं समस्त परिवार का सहयोग रहा।
श्रीसुंदरकाण्ड, हरिनाम संकीर्तन एवं रामचरितमानस की चौपाइयों से गूँजा वातावरण

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