मुंबई, 05 अक्टूबर (वेब वार्ता)। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे तथा महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे के नेतृत्व में निकाले गए विरोध मार्च पर तंज कसा है। फडणवीस ने दोनों नेताओं को लेकर ‘गजनी’ फिल्म का संदर्भ देते हुए कहा कि उन्हें याद दिलाना पड़ रहा है कि ज्ञानेश कुमार वर्ष 2025 में मुख्य चुनाव आयुक्त बने थे, जबकि महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव 2024 में हुए थे।
फडणवीस ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि 2024 में हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को 2025 में मुख्य चुनाव आयुक्त बने व्यक्ति से जोड़ना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं है। उन्होंने ठाकरे बंधुओं के मार्च को उनकी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस पाने की कोशिश बताया और दावा किया कि अपेक्षाओं के मुकाबले प्रदर्शन में लोगों की संख्या कम रही।
उद्धव-राज ने निकाला ‘विराट गर्जना मोर्चा’
उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने रविवार को मुंबई में संयुक्त रूप से ‘विराट गर्जना मोर्चा’ निकाला। मार्च में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और महाराष्ट्र में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को समाप्त करने की मांग उठाई गई। दोनों नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर भी सवाल खड़े किए।
मार्च मेट्रो सिनेमा से शुरू होकर दक्षिण मुंबई में बृहन्मुंबई महानगरपालिका मुख्यालय की ओर बढ़ा। कांग्रेस और शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के नेताओं ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने या उनके इस्तीफे की मांग की। विपक्षी दलों ने विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और मतदाता सूची में नाम जोड़ने तथा हटाने को लेकर सवाल उठाए हैं। चुनाव आयोग और भाजपा इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं।
राज ठाकरे ने प्रदर्शन के दौरान विशेष गहन पुनरीक्षण को समाप्त करने के साथ इलेक्ट्रॉनिक मतदान मशीनों की जगह मतपत्र से चुनाव कराने की मांग भी उठाई।
फडणवीस ने ‘गजनी’ का दिया उदाहरण
देवेंद्र फडणवीस ने अपने बयान में 2008 की हिंदी फिल्म ‘गजनी’ का संदर्भ लेते हुए ठाकरे बंधुओं पर कटाक्ष किया। फिल्म में मुख्य पात्र अल्पकालिक स्मृति हानि से जूझता है। फडणवीस ने इसी संदर्भ का इस्तेमाल करते हुए कहा कि उन्हें याद दिलाना पड़ रहा है कि ज्ञानेश कुमार 2025 में मुख्य चुनाव आयुक्त बने, जबकि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में हुए थे।
फडणवीस ने सवाल उठाया कि 2025 में मुख्य चुनाव आयुक्त बने व्यक्ति 2024 के चुनाव को कैसे प्रभावित कर सकते थे। उन्होंने मुंबई में हुए मार्च को ठाकरे बंधुओं की राजनीतिक स्थिति मजबूत करने के प्रयास के रूप में भी प्रस्तुत किया। यह फडणवीस का राजनीतिक आकलन है।
पुलिस ने आयोजकों के खिलाफ दर्ज की प्राथमिकी
मुंबई पुलिस ने विरोध मार्च के आयोजकों के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज की है। पुलिस के अनुसार, मार्च के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी और लागू निषेधात्मक आदेशों का उल्लंघन हुआ। आजाद मैदान थाने में मामला दर्ज किया गया।
पुलिस की कार्रवाई के बाद विरोध मार्च को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है। एक ओर ठाकरे बंधु और उनके सहयोगी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली तथा विशेष गहन पुनरीक्षण पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं महाराष्ट्र सरकार इसे राजनीतिक विरोध के रूप में देख रही है।
महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ी हलचल
उद्धव और राज ठाकरे का लंबे समय बाद एक साथ किसी बड़े राजनीतिक मंच पर आना भी इस प्रदर्शन की महत्वपूर्ण विशेषता रहा। दोनों दलों ने इस मुद्दे पर साझा रुख अपनाते हुए चुनाव आयोग और विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ आवाज उठाई है।
वहीं, भाजपा और महाराष्ट्र सरकार की ओर से विपक्ष के आरोपों का राजनीतिक जवाब दिया जा रहा है। ऐसे में विशेष गहन पुनरीक्षण और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे महाराष्ट्र की राजनीति में आने वाले दिनों में भी चर्चा का विषय बने रहने की संभावना है।




