राज्यउत्तर प्रदेशमुख्यालय के फेर में फंसा बैकलॉक अप्रूवल, कानपुर...

मुख्यालय के फेर में फंसा बैकलॉक अप्रूवल, कानपुर में सैकड़ों डीएल अटके

– चालान और क्लेम पर मंडराया संकट
’- लखनऊ में अटकी बैकलॉक फाइलें 2 महीने से एक भी बैकलॉक डीएल नहीं हुआ अप्रूव
– ​ रेड टेप बैकलॉक डीएल का अप्रूवल ठप, भटकने को मजबूर सैकड़ों आवेदक
– ​मुख्यालय स्तर पर अटका बैकलॉक अप्रूवल, चालान और क्लेम न मिलने का खतरा
(हरी शंकर शर्मा)
​कानपुर। पुराने मैनुअल ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) को ऑनलाइन और स्मार्ट कार्ड में डिजिटल कराने की प्रक्रिया में आए नीतिगत बदलाव ने सैकड़ों आवेदकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। स्थानीय परिवहन विभाग से अप्रूवल का अधिकार छीनकर सीधे राज्य मुख्यालय को सौंपे जाने के बाद से बैकलॉक डीएल का अप्रूवल पूरी तरह ठप हो गया है। नतीजा यह है कि आवेदक रोजाना आरटीओ कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं, लेकिन उन्हें कोई ठोस समाधान नहीं मिल रहा।
​​शासनादेश के अनुसार, पहले स्थानीय आरटीओ विभाग स्तर पर ही डेटा फीडिंग और अप्रूवल दोनों काम हो जाते थे। हालांकि, जून 2026 में जारी नए दिशा-निर्देशों के तहत अप्रूवल का अधिकार सीधे मुख्यालय स्तर पर केंद्रित कर दिया गया। इसके चलते अगस्त 2026 से स्थानीय स्तर पर बैकलॉक अप्रूवल की प्रक्रिया पूरी तरह बंद हो चुकी है। अब स्थानीय आरटीओ केवल फीडिंग का काम कर रहा है, जबकि अंतिम मंजूरी की फाइलें मुख्यालय स्तर पर अटकी पड़ी हैं।

​2 महीने से शून्य अप्रूवल, 200 से अधिक फाइलें पेंडिंग
​आरआई (प्राविधिक) संतोष कुमार ने बताया कि हर दिन 10 से 15 आवेदक बैकलॉक क्स् की समस्या लेकर आ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर डेटा की बैकलॉक फीडिंग तो की जा रही है, लेकिन मुख्यालय स्तर से बीते दो महीनों में एक भी डीएल का अप्रूवल नहीं मिला है। अब तक 200 से अधिक डीएल का डेटा ऑनलाइन फीड किया जा चुका है, लेकिन अप्रूवल न होने से वे सिस्टम में पेंडिंग दिख रहे हैं। हम आवेदकों को वस्तुस्थिति समझा रहे हैं, लेकिन काम रुका होने से लोगों में भारी आक्रोश है।​

डिजिटल न होने से आवेदकों पर मंडरा रही दोहरी मार
​ट्रैफिक पुलिस द्वारा चेकिंग के दौरान कागजी या गैर-ऑनलाइन डीएल को मान्य नहीं माना जा रहा है, जिससे वाहन चालकों के भारी-भरकम चालान कट रहे हैं। वहीं किसी सड़क दुर्घटना की स्थिति में यदि डीएल सिस्टम में ऑनलाइन अपडेट नहीं दिखता है, तो बीमा कंपनियां क्लेम खारिज कर सकती हैं। ​कागज से पंचिंग कार्ड और फिर स्मार्ट कार्ड की पारदर्शिता लाने की योजना, विभागीय फेरबदल और मुख्यालय स्तर पर अप्रूवल में हो रही देरी के कारण फिलहाल आम जनता के लिए भारी परेशानी का सबब बनी हुई है।

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