लखनऊ, 14 सितंबर (अजय कुमार)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत किसी भी संवैधानिक संस्था में सामान्य नागरिक का विश्वास है। जिस संस्था ने आमजन के विश्वास पर खरा उतरने का कार्य किया है, लोकतंत्र में उसके महत्व को कम करके नहीं आंका जा सकता। गुड गवर्नेंस पब्लिक ट्रस्ट पर निर्भर करता है। यदि जनता का विश्वास नहीं है, तो सुशासन के लक्ष्य को प्राप्त नहीं किया जा सकता। सुशासन की कसौटी यह है कि अन्तिम पायदान पर बैठा व्यक्ति भी संवैधानिक संस्थाओं पर विश्वास और गौरव की अनुभूति करे। अपनी जिज्ञासा एवं समस्या का नियमानुसार समयबद्ध परिणाम अपनी आँखों के सामने प्राप्त कर सके।

मुख्यमंत्री जी आज यहाँ लोकायुक्त संगठन, उत्तर प्रदेश के 50वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने लोकायुक्त प्रशासन की स्मारिका एवं सूचना पुस्तिका का विमोचन किया। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि देश में लोकपाल एवं लोकायुक्त जैसी संस्थाओं को विकसित करने की आवश्यकता पहले भी थी और आज भी है। किसी लोक सेवक द्वारा गलत कार्य किए जाने पर यदि किसी स्तर पर उसे बचाने का प्रयास हो, तो लोकायुक्त के समक्ष आने वाली शिकायत पर मेरिट के आधार पर कार्यवाही का रास्ता निकल सकता है। कोई भी लोक सेवक यदि गलत करता है, तो हो सकता है कि उसे बचाने का किसी स्तर पर प्रयास हो। जब उसकी शिकायत लोकायुक्त संगठन के पास जाती है, तो लोकायुक्त मेरिट के आधार पर उसके समाधान का रास्ता निकालता है। ‘प्रभुता पाइ जाहि मद नाहीं’ अक्सर होता है कि अनेक बार लोगों को ताकत मिलने पर वह उच्छृंखल व्यवहार करने लगते हैं। पद और शक्ति के साथ मर्यादा एवं नैतिकता का पालन सुनिश्चित करने के लिए उन पर प्रभावी संस्थागत अंकुश आवश्यक है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्ष 1975 की आपातकालीन परिस्थितियों के बाद बनी सरकार ने लोकायुक्त जैसी संस्थाओं के निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाया था और उत्तर प्रदेश में 14 सितम्बर, 1977 को लोकायुक्त संगठन का गठन हुआ। उस समय न्यायमूर्ति श्री विशम्भर दयाल जी ने लोकायुक्त संगठन को अपना नेतृत्व प्रदान किया था। आज इसकी 50 वर्षों की यात्रा एक महत्वपूर्ण और परिपक्व पड़ाव है। न्यायमूर्ति श्री संजय मिश्रा के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश लोकायुक्त संगठन अपनी नयी आभा के साथ आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि लोकायुक्त संगठन को 50 वर्षों की यात्रा का व्यापक डॉक्यूमेण्टेशन तैयार किया जाए, जिसमें अब तक प्राप्त मामलों, निस्तारित मामलों और विभिन्न प्रकार की कार्रवाई का विस्तृत विवरण हो। स्वर्ण जयन्ती के अवसर पर केवल अतीत का लेखा-जोखा ही नहीं, बल्कि आगामी 50 वर्षों की कार्ययोजना का एक बेहतर रोडमैप भी तैयार किया जाना चाहिए।
लोकायुक्त संगठन के स्वर्ण जयन्ती समारोह के क्रम में भारत के लोकपाल तथा देशभर के लोकायुक्तों को आमंत्रित कर एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जाना चाहिए। विभिन्न राज्यों की बेस्ट प्रैक्टिसेज पर चर्चा कर उन्हें साझा किया जाना चाहिए। लोकतंत्र की मजबूती के लिए संवाद अत्यन्त महत्वपूर्ण है। संगठन से जुड़े वरिष्ठ सदस्यों और न्यायमूर्ति गण को आमंत्रित कर संवाद स्थापित किया जाना आवश्यक है। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि लोकायुक्त की कार्यपद्धति को और अधिक पारदर्शी, स्वच्छ, ईमानदार एवं नैतिक बनाने की दिशा में संवाद आगे बढ़ना चाहिए। इससे आगामी 50 वर्षों की कार्ययोजना को प्रभावी रोडमैप के साथ आगे बढ़ाने में सहायता मिलेगी। शासन स्तर से लोकायुक्त संगठन को आवश्यक सकारात्मक सहयोग लगातार प्रदान किया जाएगा।

भारत के संविधान निर्माताओं ने न्याय, सत्य और समता को व्यवस्था की मौलिक आवश्यकताओं के रूप में स्वीकार किया। प्रत्येक व्यक्ति को न्याय पाने का अधिकार है और न्याय का आधार सत्य की कसौटी है। किसी व्यक्ति की जाति, मत या सम्प्रदाय के आधार पर नहीं, बल्कि शिकायत की मेरिट के आधार पर उसका समाधान होना चाहिए। वर्तमान लोकायुक्त के नेतृत्व में लोकायुक्त संगठन द्वारा तकनीक के बेहतर उपयोग से सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। शासन में भी तकनीक का उपयोग कर शिकायतों और भ्रष्टाचार की सम्भावनाओं को कम किया जा रहा है। आने वाले समय में आर्टिफिशियल इण्टेलीजेंस, डेटा एनालिसिस, साइबर सिक्योरिटी और ई-गवर्नेंस जैसी तकनीकों का उपयोग प्रशासन को अधिक पारदर्शी, संवेदनशील, प्रभावी और जवाबदेह बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। तकनीक वही उपयोगी है, जो लोककल्याण का माध्यम बने और सुशासन के लक्ष्यों को प्रभावी बनाए।
शिकायत निवारण की व्यवस्था का दुरुपयोग भी नहीं होना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति बिना किसी विशिष्ट आधार के अनावश्यक और व्यापक शिकायतें करता है, तो वह न केवल शासन की व्यवस्था का समय नष्ट करता है, बल्कि न्याय पाने के इच्छुक ईमानदार नागरिकों के समय को भी प्रभावित करता है। इसलिए शिकायतों में मेरिट और विशिष्टता आवश्यक है। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्ष 2017 में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अन्तर्गत खाद्यान्न वितरण से सम्बन्धित शिकायतें सबसे अधिक आती थीं। जनता दर्शन में आने वाले 100 लोगों में लगभग 60 लोग पी0डी0एस0 की शिकायत लेकर आते थे। सरकार ने ई-पॉस मशीनों के माध्यम से 80 हजार फेयर प्राइस शॉप को तकनीक से जोड़ा और मुख्यालय स्तर पर उसकी निगरानी की व्यवस्था की। एफ0सी0आई0 गोदाम से राशन की दुकान तक ट्रकों की ट्रैकिंग तथा निर्धारित समय में डिलीवरी सुनिश्चित की गई। इसके परिणामस्वरूप आज जनता दर्शन में पी0डी0एस0 से सम्बन्धित शिकायतें लगभग शून्य हो गई हैं।

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश में वर्तमान में लगभग 16 करोड़ लोगों को बिना भेदभाव राशन की सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है। तकनीक के कारण खाद्यान्न में घटतौली, हेराफेरी और भेदभाव की गुंजाइश समाप्त हुई है तथा सिंगल डिलीवरी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। वर्ष 2017 में राजस्व विभाग में भूमि सम्बन्धी विवाद, पैमाइश, वरासत और नामान्तरण आदि से जुड़े करीब 34 लाख मामले लम्बित थे। इनमें अकेले वरासत से जुड़े लगभग 06 लाख से अधिक मामले थे। सरकार ने प्रत्येक प्रक्रिया के लिए समय-सीमा निर्धारित करते हुए लम्बित मामलों के समयबद्ध निस्तारण की व्यवस्था लागू की। लैण्ड यूज से जुड़े मामलों में निर्धारित समय में निर्णय न होने पर डीम्ड व्यवस्था लागू की गई, जिससे सम्बन्धित अधिकारी की जवाबदेही तय हो सके।
प्रदेश में विगत 09 वर्षों में 34 लाख लम्बित राजस्व मामलों का समाधान किया गया है। इस अवधि में 09 लाख नए मामले भी आए हैं, जिनकी मेरिट के आधार पर जाँच की जा रही है। पैमाइश में मानवीय त्रुटि की सम्भावना को समाप्त करने के लिए हर तहसील में आधुनिक रोबोटिक तकनीक उपलब्ध करायी जा रही है। इसके माध्यम से इंच स्तर तक सटीक पैमाइश सुनिश्चित होगी। अब पारम्परिक जरीब के स्थान पर तकनीक के माध्यम से को-ऑर्डिनेट के आधार पर भूमि की पैमाइश की जाएगी, जिससे एक इंच भी भूमि इधर-उधर होने की सम्भावना न रहे।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जनधन खातों और डी0बी0टी0 व्यवस्था ने शासन और जनता के बीच विश्वास को मजबूत किया है। पहले यह धारणा थी कि सरकार द्वारा भेजे गए 100 रुपये में से नीचे तक केवल 15 रुपये पहुँचते हैं। आज डी0बी0टी0 के माध्यम से लाभार्थी के खाते में भेजी गयी सम्पूर्ण धनराशि सीधे धनराशि पहुँच रही है। वर्तमान में प्रदेश में 1.10 करोड़ लोगों को 12 हजार रुपये वार्षिक पेंशन की सुविधा दी जा रही है। प्रत्येक चौथे महीने सीधे उनके बैंक खातों में धनराशि भेजी जाती है। इस व्यवस्था में कोई मध्यस्थ नहीं है।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए उत्तर प्रदेश के लोकायुक्त न्यायमूर्ति श्री संजय मिश्रा ने कहा कि संगठन की 50 वर्षों की यात्रा विश्वसनीयता, निष्पक्षता, जनविश्वास और सार्वजनिक जीवन में नैतिक उत्तरदायित्व की यात्रा है। भ्रष्टाचार केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि किसान, युवा और गरीब के अधिकारों को प्रभावित करने वाला सामाजिक प्रश्न है। डिजिटल गवर्नेंस, डेटा विश्लेषण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी तकनीकों के माध्यम से पारदर्शिता और जवाबदेही को और मजबूत किया जाना चाहिए।
उपलोकायुक्त श्री सुरेन्द्र कुमार यादव ने कहा कि लोकायुक्त संगठन की स्थापना 14 सितम्बर 1977 को शुचिता, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व के उद्देश्य से हुई थी। निगरानी व्यवस्था का उद्देश्य ईमानदार लोक सेवकों को भयभीत करना नहीं, बल्कि निष्पक्षता के साथ सत्य तक पहुँचना है। आने वाले 25 वर्षों में ऐसी व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है, जिसमें नागरिकों को अपने अधिकार के लिए अनावश्यक संघर्ष न करना पड़े।
उपलोकायुक्त श्री दिनेश कुमार सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री जी के मार्गदर्शन एवं राज्य सरकार के सहयोग से लोकायुक्त संगठन को अधिक सक्षम, सुदृढ़ और आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है। लोकायुक्त संगठन संविधान की भावना, विधि के शासन, निष्पक्षता, पारदर्शिता और जनविश्वास की रक्षा के लिए भविष्य में भी पूरी निष्ठा से कार्य करता रहेगा।
उपलोकायुक्त श्री शम्भू सिंह यादव ने कहा कि निष्पक्षता, कर्मनिष्ठा और परिणाम से अनासक्ति भ्रष्टाचारमुक्त कार्य संस्कृति का आधार है। लोकायुक्त संगठन द्वारा वर्ष 2017 से 2025 के बीच परिवादों के निस्तारण का औसत लगभग 90 प्रतिशत रहा। वर्ष 2024 में निस्तारण की दर 98 प्रतिशत रही। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश लोकायुक्त संगठन की 50 वर्षों की यात्रा पर आधारित एक लघु फिल्म प्रदर्शित की गयी। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री, गृह एवं सूचना श्री संजय प्रसाद, पुलिस महानिदेशक श्री राजीव कृष्ण, सचिव लोकायुक्त डॉ0 श्रीमती रीमा बंसल सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।




