महानगरमुंबई2029 तक 21 राज्यों में यूसीसी लागू करने...

2029 तक 21 राज्यों में यूसीसी लागू करने के दावे पर भड़के संजय राउत, बोले- राजनीति हुई तो विरोध करेंगे

ठाणे, 15 सितंबर (वेब वार्ता)। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के वर्ष 2029 तक राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) शासित सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करने के ऐलान के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इस घोषणा पर सवाल उठाते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का एजेंडा है, लेकिन इसे लागू करने में कई कानूनी अड़चनें हैं।

संजय राउत ने महाराष्ट्र के ठाणे में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि अमित शाह 2029 तक 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करने की बात कर रहे हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या इसे गोवा और पूर्वोत्तर राज्यों में भी लागू किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि इस मामले में कानून का पेच मौजूद है।

‘यह भाजपा का एजेंडा है, लेकिन कानून का पेच है’

संजय राउत ने अमित शाह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “अमित शाह कहते हैं कि साल 2029 तक 21 राज्यों में यूसीसी लागू कर देंगे। उनका एजेंडा है, लेकिन क्या वह गोवा या पूर्वोत्तर में ऐसा कर पाएंगे? इसमें कानून का पेच है।”

राउत के बयान में विशेष रूप से गोवा और पूर्वोत्तर राज्यों का उल्लेख महत्वपूर्ण है। गोवा में पहले से ही एक समान नागरिक संहिता जैसी व्यवस्था के तहत अलग-अलग समुदायों के निजी कानूनों से जुड़े कई प्रावधान लागू हैं। वहीं, पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों में स्थानीय परंपराओं और जनजातीय रीति-रिवाजों से जुड़े विशेष कानूनी प्रावधान मौजूद हैं।

‘देश में एक संविधान है तो कानून भी एक होना चाहिए’

हालांकि, संजय राउत ने यह भी कहा कि देश में एक संविधान और समान कानून की अवधारणा का वह पूरी तरह विरोध नहीं करते। उन्होंने कहा कि देश में संविधान एक ही है, इसलिए कानून भी एक होना चाहिए। उन्होंने कहा, “देश में एक संविधान और एक कानून होना चाहिए। देश में संविधान तो एक ही है तो कानून भी एक होना चाहिए। यह हम सब लोग मानते हैं।”

लेकिन इसके साथ ही राउत ने भाजपा पर समान नागरिक संहिता के मुद्दे का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यदि समान नागरिक संहिता को लेकर राजनीति की जाएगी तो उनकी पार्टी इसका विरोध करेगी।

‘राजनीति करेंगे तो हमारा विरोध रहेगा’

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) सांसद ने कहा कि उनकी आपत्ति समान नागरिक संहिता के विचार से नहीं, बल्कि इसे राजनीतिक मुद्दा बनाए जाने से है। उन्होंने कहा, “आप राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का एजेंडा पूरा करना चाहते हैं। देश में एक संविधान और एक कानून होना चाहिए। यह हम सब लोग मानते हैं। लेकिन जब आप समान नागरिक कानून को लेकर राजनीति करते हैं तो हमारा विरोध रहेगा।”

राउत ने भाजपा को चुनावी राजनीति से ऊपर उठकर ऐसे मुद्दों पर विचार करने की सलाह भी दी। उन्होंने अमित शाह पर तंज कसते हुए कहा कि इस तरह की राजनीति करने के बावजूद वह देश के प्रधानमंत्री नहीं बनेंगे।

2029 तक लागू करने का लक्ष्य

अमित शाह ने रविवार, 13 सितंबर को घोषणा की थी कि वर्ष 2029 तक राजग के शासन वाले सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। समान नागरिक संहिता का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था स्थापित करना है।

भाजपा लंबे समय से समान नागरिक संहिता को अपने प्रमुख वैचारिक मुद्दों में शामिल करती रही है। उत्तराखंड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन चुका है। इसके बाद अन्य राज्यों में भी इसे लागू करने की प्रक्रिया और संभावनाओं को लेकर चर्चा तेज हुई है।

हालांकि, अलग-अलग राज्यों की सामाजिक, सांस्कृतिक और कानूनी परिस्थितियां अलग हैं। विशेष रूप से पूर्वोत्तर के जनजातीय क्षेत्रों में पारंपरिक कानूनों और संवैधानिक विशेष प्रावधानों को देखते हुए समान नागरिक संहिता को लागू करना राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

ऐसे में अमित शाह के 2029 तक 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करने के लक्ष्य और संजय राउत की आपत्ति के बाद यह मुद्दा आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति में एक बार फिर प्रमुख बहस का विषय बन सकता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img
- Advertisement -spot_img

Latest

- Advertisement -spot_img
- Advertisement -

More articles

- Advertisement -
- Advertisement -